स्पोर्ट्स लिट्रेसी मिशन लांच अब देश के नौजवान दूर कर पाएंगे खेल निरक्षरता

 अ वे ऑफ लाइफ नाम के गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने 'स्पोर्ट्स लिट्रेसी मिशन' पहल की मंगलवार को शुरुआत की

By: Kuldeep

Published: 22 Aug 2017, 05:59 PM IST

नई दिल्ली । देश में जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खेलों को जीवन का अभिन्न अंक बनाने और लोगों को शिक्षित करने के लिए स्पोर्ट्स : अ वे ऑफ लाइफ नाम के गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने 'स्पोर्ट्स लिट्रेसी मिशन' नाम की पहल की मंगलवार को शुरुआत की। एनजीओ का इस पहल से मकसद जमीनी स्तर पर बच्चों को खेलों की जानकारी और खेलों का पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना है। इस मौके पर 20 से अधीक अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी मौजूद थे।

एनजीओ के संस्थापक कनिष्क पाण्डेय ने बताया कि उनका मकसद देश में शुरुआती स्तर पर फैली खेलों के प्रति निरक्षरता को दूर करना है ताकि ज्यादा से ज्यादा माता-पिता अपने बच्चों को खेलों में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित करें और बच्चे भी खेलों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा, "हमारा मकसद प्राचीन शिक्षा गुरुकुल पद्धति के अनुसार शिक्षा और खेल को एक साथ जोड़कर प्राथमिक स्कूलों में खेलों की नर्सरी के रूप में विकसित कर बच्चों को खेल साक्षरता प्रदान करना है।"

इस मौके पर हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी ध्यानचंद के बेटे और 1975 विश्व कप में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अगर हमारे देश को खेलों में आगे जाना है तो बच्चों की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना होगा और उन्हें पर्याप्त सुविधाएं देनी होंगी।

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हॉकी स्टार ध्यानचंद ने मौके पर किया संबोधित -
विश्व कप फाइनल में भारत के लिए विजयी गोल करने वाले अशोक ध्यानचंद ने कहा, "कमी शुरुआत में है। हमें देखना होगा कि स्कूल में शिक्षकों का किस तरफ रूझान है, घर में मां-बाप का किस तरफ रूझान है। हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि हम बच्चों को सही सुविधाएं दे पा रहे हैं। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चों का खेलों की तरफ ध्यान आर्किषत करने के लिए स्कूल, सरकारें क्या प्रयास कर रहे हैं। साथ ही बच्चों के मानसिक स्तर को कैसे बढ़ाया जाए यह बात भी काफी अहम है।"

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जफर अब्बास भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उनका मानना है कि भारत में खेलों के स्तर में सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी भी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने कहा, "खेलों के स्तर में सुधार हुआ है। पहले हॉकी का नाम हर जगह होता था, लेकिन वक्त के साथ बदलाव हुआ। बीते कुछ वर्षों में बाकी खेलों में भी सुधार देखने को मिला है। चाहे वो कबड्डी हो, चाहे क्रिकेट हो या कुश्ती हो। हालांकि अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश जो जमीनी स्तर से आएगा। हमें वहां पर ध्यान देने की जरूरत है।"

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