रिपोर्ट: पाकिस्तान में ज्यादातर हिंदू मंदिर खस्ताहाल, ध्यान नहीं दे रही सरकार

- पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित आयोग ने खोली पोल

- रक्षा और सुरक्षा के लिए हों पूरे जतन

- यह खुलासा पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए आयोग ने किया है।

By: विकास गुप्ता

Updated: 09 Feb 2021, 04:56 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के अधिकांश धार्मिक स्थल बदहाल स्थिति में हैं और उनके रख-रखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारी नाकाम रहे हैं। यह खुलासा पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए आयोग ने किया है। सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया कि हिंदू मंदिरों के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी), हिंदुओं के अधिकांश प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थलों की सही व्यवस्था और रक्षा में विफल रहा है। रिपोर्ट में हिंदुओं और सिखों के पवित्र स्थलों के पुनर्वास के लिए एक कार्यकारी समूह स्थापित करने के लिए ईटीपीबी एक्ट में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है। दिसंबर में खैबर पख्तूनख्वा के करक के टेरी गांव में कट्टरपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के सदस्यों ने एक मंदिर में तोडफ़ोड़ करते हुए आग लगा दी थी। भारत सहित दुनिया भर में इसकी निंदा हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था।

प्राचीन मंदिरों तक की सुध नहीं-
शोएब सुदाल के एक सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट में करक के टेरी मंदिर, चकवाल के कटास राज मंदिर, मुल्तान के प्रह्लाद मंदिर, लसबेला के हिंगलाज मंदिर का दौरा कर इनकी दशा सुधारने का कहा गया। इन मशहूर प्राचीन मंदिरों के बुरे हालात हैं तो कम ज्ञात मंदिरों की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।

90 लाख हिंदू: पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। आधिकारिक तौर पर 75 लाख जबकि समुदाय के अनुसार, 90 लाख से अधिक हिंदू यहां हैं। सबसे अधिक सिंध में हैं।

संपत्ति हड़पने में लगा ईटीपीबी-
करक के टेरी मंदिर में आगजनी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी के अपने आदेश में ईटीपीबी को पूरे पाकिस्तान में सभी मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों की एक विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था। रिपोर्ट में कहा गया कि ईटीपीबी के अनुसार, 365 मंदिरों में से केवल 13 का प्रबंधन उनके द्वारा किया जा रहा था, हिंदू समुदाय पर 65 की जिम्मेदारी थी। वहीं, शेष 287 को भू-माफियाओं के भरोसे छोड़ दिया गया। आयोग ने आरोप लगाया कि ईटीपीबी केवल प्रवासित अल्पसंख्यकों की मूल्यवान संपत्तियों पर कब्जा करने में रुचि रखता है।

विकास गुप्ता
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