पाकिस्‍तान: युवाओं के भरोसे पर खरा उतरना, इमरान सरकार के लिए बड़ी चुनौती

पाकिस्‍तान: युवाओं के भरोसे पर खरा उतरना, इमरान सरकार के लिए बड़ी चुनौती

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: Mar, 17 2019 01:40:04 PM (IST) पाकिस्तान

  • इमरान के लिए लोगों के भरोसे पर खरा उतरना आसान नहीं
  • पाक पीएम के लिए राहत भरी बात ये है कि लोग उन्‍हें और समय देना चाहते हैं
  • रोजगार की कमी और आर्थिक तंगहाली से पार पाना सबसे बड़ी समस्‍या

नई दिल्‍ली। इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (आईआरआई) द्वारा पाकिस्‍तान में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कराए गए एक सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है। इस सर्वे में उत्‍तरदाताओं ने बताया कि जुलाई, 2018 में पीटीआई प्रमुख इमरान को पीएम बनाकर भले ही देश की जनता ने गलत नहीं किया, लेकिन युवाओं से किए चुनावी वादों को पूर करना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्‍तान के युवा मानते हैं कि रोजगार मुहैया कराना इमरान सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौ‍ती साबित होने वाली है।

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77% युवाओं की नजर में रोजगार की कमी बड़ी समस्‍या
आईआरआई सर्वे 2018 के मुताबिक 39 प्रतिशत लोग मानते हैं कि मुद्रास्‍फीति सबसे बड़ी चुनौती है। 18 फीसदी लोग गरीबी को तो 15 फीसदी लोग बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं लेकिन 18 से 35 उम्र के करीब 77 फीसदी युवा मानते हैं कि युवाओं के लिए सबसे बड़ी समस्‍या रोजगार के अवसरों का बड़े पैमाने पर अभाव है। आगामी वर्षों में इमरान सरकार के लिए यही सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा।

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40% लोग अभी और समय देना चाहते हैं
पाक सरकार के लिए राहत की बात ये है कि करीब नौ महीने के इमरान खान के कार्यकाल को सर्वे में शामिल 57 प्रतिशत लोग संयुक्‍त रूप से बहुत अच्‍छा या अच्‍छा मानते हैं। इनमें से 17 फीसदी मतदाता मानते हैं कि वो बहुत अच्‍छा काम कर रहे हैं जबकि 40 फीसदी उत्तरदाताओं को लगता है कि प्रधानमंत्री इमरान खान का अभी तक का काम अच्‍छा है। जहां तक चुनावी वादों को पूरा करने की बात है तो इस मामले में 40 फीसदी उत्‍तरदाता इसके लिए उन्‍हें एक से दो साल का समय और देना चाहते हैं। इनमें से 26 फीसदी लोग एक साल तो 14 फीसदी लोग उन्‍हें दो साल का समय देना चहते हैं।

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आर्थिक दुष्‍चक्र

आईआरआई के क्षेत्रीय निदेशक जोहन्‍ना काव का कहना है कि इमरान सरकार के कामकाज का आकलन प्रारंभिक स्‍तर पर सरकार की उपलब्धियों और आर्थिक सुधारों के आधार पर जज किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि अधिकांश लोगों का मनना है कि गरीबी और खराब अर्थिक मंदी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। इन चुनौतयों के बावजूद इमरान खान विश्‍वास से कमजोर नहीं है। ये बात भी उतना ही सच है कि इससे पार पाने के लिए पाकिस्‍तान सकरार को सख्‍त कदम उठाने होंगे ताकि पाकिस्‍तान की आर्थिक दुष्‍चक्र से बाहर आ सके।

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सर्वे 3,991 युवाओं मतों पर आधारित
आईआरआई सर्वे 2018 नवंबर एक और 22, 2018 के बीच कराया गया था। सर्वे में पाकिस्‍तान के सभी क्षेत्रों से 18 और उससे अधिक आयु के 3,991 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया था।

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