Pakistan: इस्लामाबाद में बनने वाले पहले कृष्ण मंदिर के खिलाफ फतवा जारी, कहा- इस्लाम इजाजत नहीं देता

HIGHLIGHTS

  • पाकिस्तान ( Pakistan ) की राजधानी इस्लामाबाद ( Islamabad ) में बनने वाले पहले हिन्दू मंदिर ( Hindu Temple ) का विरोध शुरू हो गया है। इसको लेकर फतवा ( Fatwa ) जारी किया गया है।
  • पाकिस्तान में मजहबी शिक्षा देने वाली संस्थान जामिया अशर्फिया ने कहा कि पाकिस्तान में मंदिर का निर्माण ( Construction of temple in Pakistan ) इस्लाम के खिलाफ है और ये मदीना का अपमान होगा।
  • पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में भगवान श्री कृष्ण का भव्य मंदिर ( temple of Lord Shri Krishna ) की नींव रखी गई थी।

By: Anil Kumar

Updated: 02 Jul 2020, 04:31 PM IST

इस्लामाबाद। हिन्दू व अन्य अल्पसंख्यकों ( Minority ) के साथ बर्बरता की खबरें आए दिन पाकिस्तान ( Pakistan ) से सामने आती रहती है, लेकिन सरकार इससे इनकार करती रही है। लेकिन एक बार फिर से पाकिस्तान सरकार ( Pakistan Government ) के दावों की पोल खुल गई है।

दरअसल, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद ( Islamabad ) में बनने वाले पहले हिन्दू मंदिर ( Hindu Temple ) (कृष्ण मंदिर) का विरोध शुरू हो गया है। इसको लेकर फतवा ( Fatwa ) जारी किया गया है और इस्लाम के खिलाफ बताया है। पाकिस्तान में मजहबी शिक्षा देने वाली संस्थान जामिया अशर्फिया ( Jamia Ashrafiya ) ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान में मंदिर का निर्माण इस्लाम के खिलाफ है और ये मदीना का अपमान होगा। संस्थान ने 20 हजार वर्ग फीट में बनने वाले मंदिर को इस्लाम के खिलाफ बताते फतवा जारी किया है।

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बता दें कि मंदिर का निर्माण रोकने के लिए एक वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में भगवान श्री कृष्ण का भव्य मंदिर की नींव रखी गई थी। इस मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान ( PM Imran Khan ) ने 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

गैर-मुस्लिमों के लिए मंदिर निर्माण इस्लाम के खिलाफ

जामिया अशर्फिया की लाहौर यूनिट के प्रमुख मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा है कि इस्लाम में अल्पसंख्यक समुदायों ( Minority communities ) के धार्मिक स्थलों की मरम्मत पर सरकारी धन खर्च करने की इजाजत है, लेकिन गैर-मुस्लिमों के लिए मंदिर या नए धार्मिक स्थल बनाने की मंजूरी नहीं दी गई है।

ऐसे में आम नागरिकों के टैक्स के पैसे से अल्पसंख्यकों के लिए मंदिर निर्माण के लिए पैसे खर्च करना सरकार के फैसले पर कई तरह के सवाल खड़े करता है। इधर, मंदिर निर्माण का विरोध को लेकर अल्पसंख्यक सांसद लाल चंद मल्ही ( Lal Chand Malhi ) ने कहा, ‘हमें विरोध की परवाह नहीं है। मंदिर निर्माण जारी रहेगा।’

इसी बीच इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ( Islamabad High Court ) में एक वकील ने याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा कि है कि यह योजना राजधानी के लिए तैयार मास्टर प्लान के अंतर्गत नहीं आती है। कोर्ट ने मंदिर निर्माण के खिलाफ दायर एक याचिका पर कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी ( Capital Development Authority ) (सीडीए) को नोटिस जारी किया है।

20 हजार स्क्वायर फीट में बन रहा है मंदिर

आपको बता दें कि इस्लामाबाद में पहले हिन्दू मंदिर ( एक कृष्ण मंदिर ) के निर्माण को लेकर कुछ दिनों पहले इस्लामाबाद कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 20 हज़ार स्क्वायर फ़ीट जमीन दान में दी थी। इसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री इमरान खान ने लोगों को दी थी।

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मंदिर के निर्माण के लिए 23 जून को सांसद और मानवाधिक मामलों के संसदीय सचिव लाल चंद माल्ही को नियुक्त किया गया था। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने इस जमीन को इस्लामाबाद की हिंदू पंचायत को सौंप दी। साथ ही इमरान खान ने मंदिर निर्माण ( Temple construction ) के प्रथम चरण में 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की।

इसको लेकर लाल चंद माल्ही ने ट्वीट करके कहा था, 'यह इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर होगा। सरकार ने मंदिर के निर्माण के लिए जमीन दी है, पाकिस्तान जिंदाबाद।' मालूम हो कि पाकिस्तान में लगभग 80 लाख हिंदू रहते हैं। दक्षिणी सिंध प्रांत के उमरकोट, मीरपुर ख़ास और थारपाकर में अच्छी-खासी संख्या में हिंदू रहते हैं। वहीं, इस्लामाबाद में लगभग 3,000 हिंदू रहते हैं।

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