डेढ़ लाख किसानों को एक साल तक करना पड़ेगा बारिश का इंतजार, जानिए कैसे

डेढ़ लाख किसानों को एक साल तक करना पड़ेगा बारिश का इंतजार, जानिए कैसे

Rajendra Singh Denok | Publish: Sep, 07 2018 10:40:25 AM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 10:58:37 AM (IST) Pali, Rajasthan, India

- मानसून की बेरुखी

- दो लाख हैक्टेयर भूमि में इस बार नहीं होगी रबी की बुवाई
- पिछले साल से आधी बारिश भी नहीं होने से 51 बांध सूखे पड़े

पाली । मानसून की बेरुखी के कारण इस बार डेढ़ लाख किसान रबी की बुवाई नहीं कर पाएंगे। करीब 2 लाख हैक्टेयर भूमि में रबी की पैदावार नहीं हो पाएगी। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों को खरीफ के साथ रबी की फसल भी हाथ नहीं लगेगी। दरअसल, अपेक्षानुरूप जिले में इस बार इंद्र की मेहर नहीं बरसी। इससे ना तो नदियां बह पाई और ना ही बांधों में पानी पहुंच पाया। अब जबकि रबी की फसल की बारी है, तो उन्हें सिंचाई के लिए बांधों से पानी नहीं मिल पाएगा। इससे किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक जिले में 263 एम.एम. बारिश ही हुई है। जबकि पिछले वर्ष 2017 में 774 एम.एम. औसत बारिश हुई थी। पिछले साल के मुकाबले में इस बार आधी बारिश भी नहीं हुई।

1 लाख हैक्टेयर भूमि में होती है सेवज खेती
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पाली, रोहट, मारवाड़ जंक्शन व सोजत क्षेत्र में करीब 1 लाख हैक्टेयर भूमि में सेवज रबी की फसल होती है। 80 हजार हैक्टेयर में चणा, 10 हजार हैक्टेयर में तारामीरा व 10 हजार हैक्टेयर में सरसों की सेवज फसल होती है। इस बार बारिश नहीं होने से करीब 1 लाख हैक्टेयर भूमि में सेवज खेती नहीं हो पाएगी। खास बात ये है कि 52 बांधों से करीब 1 लाख हैक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है। जवाई बांध को छोड़ कर सभी 51 बांध सूखे पड़े हैं। दो तीन बांधों में नाम मात्र का पानी है। बांधों में पानी नहीं आने से इस बार किसानों के खेत खलिहानों में पानी नहीं पहुंच पाएगा।

सेवज खेती करने वाले किसानों को नुकसान
जिले में करीब 1 लाख हैक्टेयर भूमि में सेवज रबी की फसल होती है। इसमें सबसे ज्यादा करीब 90 हजार में चणे की फसल होती है। पिछली बार जिले में प्रति हैक्टेयर 13.50 क्विंटल चणे की औसत पैदावार हुई थी। सरकार ने किसानों से समर्थन मूल्य पर 4400 रुपए प्रति क्विंटल चणे की खरीद की थी। इस हिसाब से सेवज चणे की खेती करने वाले किसानों को करीब 594 लाख रुपए की पैदावार नहीं होगी। इतने ही हैक्टेयर में बांधों से सरसों की फसल सिंचाई होती है।

नहीं होगी सेवज की खेती
अभी तक हुई बारिश से तो सेवज खेती नहीं हो पाएगी। बांधों में पानी नहीं होने से किसानों को नुकसान होगा। जिले में सेवज खेती काफी होती है।
जितेन्द्रसिंह शक्तावत, उपनिदेशक, कृषि विभाग विस्तार पाली

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