सेवानिवृत शिक्षक ने श्मशान को बना दिया रमणीय

गणतंत्र के पहरुए : पाली जिले के तखतगढ़ में 20 सालों से दे रहे नि:शुल्क सेवा
-सैकड़ों पौधे लगाकर पलटी काया

Suresh Hemnani

January, 2007:59 PM

पाली/पावा। जीवन में समाज व राष्ट्र के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो कोई बाधा आड़े नहीं आती है। किसी की सहायता भी नहीं तो भी सफलता कदम चूमती है। ऐसे ही लोग समाज के प्रेरणास्रोत बनते हैं। उन लोगों को नाम या ख्याती की लालसा भी नहीं होती है। ऐसे ही एक सेवानिवृत शिक्षक है भूराराम परमार [ Retired teacher Bhuraram Parmar ] । जिन्होंने वर्ष 1997 में सेवानिवृत होने पर प्रण किया वे समाज के लिए हमेशा कुछ नया करते रहेंगे। इसी जज्बे के चलते उन्होंने तखतगढ़ के गोगरा मार्ग स्थित श्मशान [ Crematorium ] की काया पलट दी। आज वह श्मशान रमणीय स्थल का रूप ले चुका है। सेवानिवृति के बाद उन्होंने श्मशान में पौधरोपण [ Plantation ] शुरू किया। इसके लिए उन्होंने दानदाताओं से भी सहयोग लिया।

कस्बे के पावा मार्ग के श्मशान का रूप बदलने के लिए सेवानिवृत शिक्षक भूराराम परमार वर्ष 1997 से लगातार सेवाएं दे रहे है। उनके प्रयासों से श्मशान घाट चमन हो चुका है। उन्होंने शवों को श्मशान तक लाने के लिए आठ निशनियां भी बनवाकर रखवाई है। अंतिम संस्कार में लकडिय़ों से होने वाली आय से पालिका मद से बनाए गए सभागार के प्रथम तल पर पक्षियों के लिए एक लाख बीस हजार रुपए में चूग्गा चबूतरा बनाया। श्मशान का दरवाजा भी तैयार करवाया। पालिका की ओर से हाई मास्ट लाइट भी लगवाई है। जिससे रात के समय में कोई परेशानी नहीं हो। यहां स्नानागार की व्यवस्था भी की है।

समाज की सेवा से भी जुड़ाव
परमार का 20 गावों के परगनों से भी जुड़ाव है। वे समाजहितो के प्रति भी कई कार्य करते हैं। वे प्रतिदिन 10 किलोमीटर तक साइकिल चलाते। इसके लिए युवाओं को भी प्रेरित करते है। उनका कहना है कि साइकिल चलाने से शरीर भी स्वस्थ रहता है।

Suresh Hemnani Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned