कोरोना के योद्धा : बेसहारों का सहारा बने ओम, मां की स्मृति में रोजाना बांट रहे बीस किलो रोटियां

-घर की महिलाएं रोटियां बनाने में करती हैं पूरी मदद
-पेशे से कांट्रेक्टर ओम वैष्णव

Suresh Hemnani

25 Mar 2020, 05:04 PM IST

पाली। बेसहारों का सहारा बन जाए वही सच्चा मानव है...देवदूत है। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए किए गए 21 दिन के लॉक डाउन में जहां खानाबदोश और बेसहारा लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में शहर का एक युवक अपने मां की स्मृति में रोजाना बीस किलो आटे की रोटियां बनाकर बेसहारा लोगों को खिला रहा है।

नवलखा रोड पुरानी सब्जी मंडी भाटों का बास में रहने वाले ओम वैष्णव जब से कोरोना वायरस का कहर शुरू हुआ, असहाय लोगों के भोजन की व्यवस्था करने में लगे हुए हैं। वह शाम पांच बजे नियमित रूप से लोर्डिया पाल, बांडी नदी, रेलवे स्टेशन इत्यादि ऐसे इलाकों में पहुंचते हैं और अपने हाथों से लोगों को रोटियां उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने बीस किलो का माप रोजाना के लिए तय रखा है। जरूरत पडऩे पर ज्यादा भी बनवा लेते हैं।

घर की महिलाएं बनाती हैं रोटियां
पेशे से कांट्रेक्टर ओम वैष्णव के घर की महिलाएं इस काम में पूरी मदद करती हैं। वे स्वयं घर पर ही रोटियां बनाती है। बीस किलो आटे की राटियां बनाने में उन्हें कुछ वक्त जरूर लगता है लेकिन सेवाभाव उनके लिए सर्वोपरि है।

जब तक संकट, नियमित करेंगे सेवा
वैष्णव बताते हैं कि विकट परिस्थितियों में सभी को एकजुटता से सेवा-सुश्रुवा में जुटना चाहिए। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार बेसहारा और पीडि़तों की मदद के लिए आगे आए तो मुश्किलें काफी कम हो जाती है। कोरोना का संकट रहने तक बेसहारा लोगों की सेवा में जुटा रहुंगा।

Corona virus
Suresh Hemnani Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned