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मिर्गी से रहें सावधान, उपचार में न बरते लापरवाही

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस विशेष :
-गेस्ट एडिटर- डॉ. जयराज सिंह शेखावत

पाली

Published: November 17, 2021 04:08:33 pm

पाली। मस्तिष्क में विकार होने से जो शारीरिक आक्षेप, दौरे, या विकृत चैष्टाए, मूर्छा या विकृत प्रतीतिया होती है, उसे मिर्गी कहते हैं। क्योंकि न्यूरॉन्स मस्तिष्क की तंत्रिकाओं में अचानक असामान्य एवं अत्यधिक विद्युत का संचार होने के कारण दौरा पड़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप रोगी मूर्छित हो जाता है। यह प्रति एक हजार पर 5 व्यक्तियों में देखा गया है । मस्तिष्क में करोड़ों तंत्रिकाएं है और इन के विभिन्न काम है। यह अतिसूक्ष्म तंत्रिकाएं पूरे शरीर में अपना नियोजित अलग-अलग कार्य करती है। इन तंत्रिकाओं के परस्पर चिपकने, दबने या इनके कार्य में अवरोध आने से जो झटके, दौरे, मूर्छा आती है, वह मिर्गी है। इसके उपचार में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
मिर्गी से रहें सावधान, उपचार में न बरते लापरवाही
मिर्गी से रहें सावधान, उपचार में न बरते लापरवाही
यह है लक्षण
अचानक मूर्छित होना, बिना आवाज के चक्कर के साथ गिर जाना, बेहोश हो जाना, कंपन, चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव तथा जकडऩ, हाथ पैरों में अनियंत्रित झटके आना, हाथ-पैरों में सनसनी या सूनापन तथा सुई चुभने जैसा आभास होना, दंातों का चिपक जाना, मुंह से झाग आना, कभी.कभी बेहोशी में पेशाब का निकल जाना, होश आने के बाद उल्टी या सिर में भारीपन, थकान, दौरे के समय आंखों या चेहरे का टेढ़ापन आदि लक्षण है।
मिर्गी के कारण
मस्तिष्क की चोट, ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, आनुवंशिक या जन्मजात विकृति, सिर पर बोझ उठाना, मस्तिष्क में संक्रमण, तेज बुखार से ज्यादा चिंता .क्रोध, दुख, तनाव तेज रोशनी आदि कारणों से मस्तिष्क का मेटाबोलिज्म असामान्य होने पर अथवा ब्रेन सेल्स की मृत्यु से मस्तिष्क में विकृति आने पर मिर्गी के दौरे पड़ते हैं।
यह रखें सावधानी...
बेहोशी में मुंह में चम्मच अंगुली या पानी नहीं डालें, कोई भी वस्तु सुघांएं नहीं, दौरे के दौरान रोगी को नियंत्रित करने की कोशिश भी नहीं करे। पीडि़त को एक तरफ लेटा दे, जिससे उसके मुंह से निकलने वाला तरल पदार्थ सुरक्षित ढंग से बाहर की ओर आ सके।
ये है उपचार
वायुमार्ग श्वासनली- इसमें झाग, उल्टी या अन्य तरल पदार्थ नहीं हो, इस मार्ग को साफ रखें
वसन- श्वास दर पर गंभीरता से नजर रखें, श्वास गति को सामान्य रखें ।
रक्तचाप- रक्तचाप रक्त परिसंचरण तथा नाङी की गति को सामान्य रखें ।।
1 पंचकर्म चिकित्सा
2 शमन चिकित्सा
3 औषध चिकित्सा

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