संकट में भी नहीं छोड़ी अपणायत : मैं भी भूखा ना रहूं, ‘साधु’ न भूखा जाए...

-पाली का अपनत्व व दया भाव देश में नजीर
-कोरोना के कहर बरपाना शुरू करते ही खोल दिए थे ‘खजाने के द्वार’

By: Suresh Hemnani

Published: 11 Jun 2021, 08:00 AM IST

-राजीव दवे
पाली। सांईं इतना दीजिए, जा में कुटुंब समाए। मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाए। इस दोहे की पंक्तियां पाली निवासियों के जीवन का मूलमंत्र है। जब भी संकट का समय आता हैं, यहां के लोग शहर में होली पर बादशाह के खजाना लुटाने की तरह अपने घरों के द्वार खोल देते हैं। ऐसा ही कोरोना की पहली लहर से लेकर अब तक शहर व गांवों में हो रहा है। अस्पताल में मरीज भर्ती हुए तो उनके लिए चाय, नाश्ता, भोजन, काढ़े की व्यवस्था करने के लिए जिलेवासी तन, मन व धन से लग गए। मरीजों के साथ उनके परिजनों और जरूरतमंदों को भी भूखा नहीं रहने दिया। जिनका रोजगार छिन गया, उनके बच्चों के मुंह तक निवाला पहुंचाया। जिलेवासी पशु-पक्षियों के साथ जंगल में बंदरों तक को भोजन करवा रहे हैं। ऐसे ही कुछ संगठनों व लोगों से आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं...

तय समय पर पहुंचाया नाश्ता व भोजन
सेवा समिति वृद्धाश्रम ने कोरोना की पहली लहर आते ही बांगड़ चिकित्सालय में मरीजों, चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों आदि के लिए नाश्ता, भोजन, चाय आदि की व्यवस्था शुरू की थी। समिति की ओर से रोजाना तय समय सुबह सात बजे चाय व नाश्ता, दोपहर एक बजे व शाम सात बजे भोजन। जिसमें सब्जी, रोटी, दाल, चावल सहित अन्य सामग्री होती थी। समिति के प्रमोद जैथलिया बताते है कि अभी तक करीब 80 हजार भोजन के पैकेट दिए जा चुके है। वे कहते हैं सेवा के लिए सहायता करने वाले जिलेवासियों के साथ अन्य देशों तक में रहने वाले आगे आए और अभी तक सहयोग कर रहे हैं। जिलेवासियों का मानना है कि भगवान ने कुछ दिया है तो जरूरतमंदों की सहायता जरूर करनी चाहिए। समिति की ओर से गायों को भी भोजन करवाया जाता है।

रोजाना भोजन करते हैं 150-250 लोग
महावीर इंटरनेशनल की ओर से पिछले साल अक्टूबर से जरूरतमंदों को भोजन करवाने की शुरुआत पुराना बस स्टैण्ड के पास की गई। वहां रोजाना 150 से 250 लोगों को दो सब्जी, रोटी, नमकीन, मिठाई, अचार परोसकर सम्मान भोजन करवाया जाता है। संस्था के जोन सचिव तेजपाल जैन बताते हैं कि कोरोना के समय अस्पताल में मरीजों आदि को काढ़ा पिलाया। उनके लिए फल, भोजन की व्यवस्था की। कोरोना में गाये भूखे नहीं रहे। इसके लिए रोजाना 150 किलो आटे की रोटी बनवाकर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में गायों को खिलाते हैं। उनके लिए चारा भी लगातार डलवा रहे हैं। जोन चेयरमैन राजेन्द्र भंडारी व अध्यक्ष श्रवण कोठारी का कहना है कि सेवा करने से सुकून मिलता है। ईश्वर ने सहायता करने योग्य बनाया है तो उससे पीछे कभी नहीं हटना चाहिए।

शहर व हाइवे पर दौड़ाया रोटी रथ
पिछले साल कोरोना का काळ पैर पसार रहा था। लोग हाइवे पर भूखे ही पैदल चल रहे थे। शहर में कई लोगों के सामने रोटी का संकट गहराया तो शुरुआत हुई रोटी बैंक की। हाइवे पर भूखे-प्यासे चल रहे लोगों व शहर के जरूरतमंदों के लिए रोटी रथ के पहिए दौड़ पड़े। अध्यक्ष आनन्द कवाड़ का कहना है कि इस बीच गायों व बंदरों का ख्याल आया तो उनके लिए भी रोटी बनाना शुरू किया। शिवगंज के पास काम्बेश्वर जाकर अभी तक वानरों को मूंगफली, फल, ब्रेड, रोटी सहित कई चीजे खिलाते हैं। रोटी बैंक से अभी रोजाना 300 लोग टिफिन ले जाते हैं। वहां पर प्रतिदिन 300 किलो आटे की रोटी बनाई जाती है। कबूतरों व मोरों के लिए हर रविवार को दाना डाला जाता है। जब ट्रेने पिछले साल यहां से गई थी तो बैंक ने हर यात्री को गंतव्य तक पहुंचने तक का भोजन उपलब्ध कराया था।

देने वाला बाबा, लेने वाला भी बाबा
बाबा रामदेव सेवा समिति की ओर से अस्पताल में कोविड के अलावा आने वाले मरीजों व उनके परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। इनका एक ही कहना है देने वाला भी बाबा ओर पाने वाला भी बाबा। संस्थापक अध्यक्ष बाबूसिंह राजपुरोहित बताते है कि चंद लोगों ने मिलकर समिति की शुरुआत की थी। अब इसमें कई लोग जुड़े है। रोजाना 800-1000 पैकेट भोजन व 600-700 पैकेट नाश्ते के वितरित किए है। इसके अलावा शहर के 100 जरूरतमंदों को भी रोजाना भोजन करवाते हैं। शहर व गांवों में 50 परिवार तो ऐसे है जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनको पिछले साल से ही हर पन्द्रह दिन में सूखी राशन सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया ग्रु्रप भी बनवाए। जिससे जरूरतमंदों की सूचना हमे मिले और उनको भोजन करवा सके।

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