ऑटिज्म पीडि़त बच्चों को ऊंटनी का दूध पहुंचाना बंद

पीड़ा : ‘सेतु’ बना था रेलवे, मगर अब हाथ खींचे

By: rajendra denok

Updated: 16 May 2020, 05:35 PM IST

-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। लॉकडाउन [ Lockdown ] में करीब एक माह तक दरियादिली दिखाने के बाद रेलवे प्रशासन [ Railway administration ] अचानक कठोर दिल हो गया। देशभर में ऑटिज्म और फूड एलर्जी पीडि़त बच्चों के लिए कैमल मिल्क [ Camel milk ] (ऊंटनी का दूध) पहुंचाने में सेतु बने रेलवे ने एकाएक अपने हाथ खींच लिए हैं। इससे सैकड़ों पीडि़त बच्चों के लिए संजीवनी का संकट खड़ा हो गया है। पिछले एक माह में अकेले पाली जिले से 550 पीडि़त बच्चों तक पार्सल ट्रेनों के जरिए अल्प समय में दूध पहुंचाया गया था।

रेलवे यों बना सेतु
पिछले महीने मुम्बई की एक महिला नेहाकुमारी ने प्रधानमंत्री को ट्वीट किया कि उसका बच्चा फूड एलर्जी जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त है। बेटे के जिंदा रहने के लिए कैमल मिल्क की सख्त आवश्यकता है। उड़ीसा में तैनात राजस्थान मूल के आइपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने ट्वीट पढ़ा और उन्होंने रेलवे अधिकारियों से सम्पर्क किया। लुधियाना से मुम्बई जा रही पार्सल टे्रन को फालना रेलवे स्टेशन पर रुकवाया। जहां लोक हित पशुपालक संस्थान से 20 लीटर दूध और इतना ही पाउडर टे्रन में पार्सल करवाया। महिला को 50 घंटे के भीतर दूध उपलब्ध हो गया। इसके बाद रेलवे ने न केवल ऊंटनी का दूध बल्कि अन्य आपातकालीन वस्तुएं अल्प समय में पहुंचाने के लिए सेतु योजना बनाई।

भिजवाया 400 लीटर दूध
सादड़ी में संचालित लोक हित पशुपालक संस्थान के जरिए पिछले एक माह में 400 लीटर कैमल मिल्क भुवनेश्वर, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद समेत कई शहरों में ऑटिज्म पीडि़त बच्चों तक पहुंचाया जा चुका है। रेलवे ने बच्चों के घरों तक दूध पहुंचाने की जिम्मेदारी ली थी।

ये हैं ऑटिज्म
ऑटिज्म या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस्ऑर्डर (मंदबुद्धि)एक दिमागी बीमारी है। इससे मरीज न तो अपनी बात ठीक से कह पाता है और ना ही दूसरों की बात समझ पाता है। वह किसी से संवाद भी नहीं कर सकता। इसके लक्षण बचपन से ही नजर आते हैं। ऊंटनी का दूध इसके उपचार में असरदार माना जाता है। लोक हित पशुपालक संस्थान के निदेशक हनुवंत सिंह राठौड़ के अनुसार हैदराबाद, मथुरा, चैन्नई जैसे शहरों से बच्चों के परिजनों के फोन आ रहे हैं।

इनका कहना है...
-लॉकडाउन में यह नवाचार किया गया था। ऐसा करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों का अन्यत्र पदस्थापन हो गया है। इसलिए हो सकता है कि कुछ बदलाव हुआ हो। हालांकि, यह बहुत अच्छी योजना है। -अंकित कुमार, रेलवे डीसीएम, दिल्ली

-वैसे तो रेलवे में पास सुविधा हर समय उपलब्ध है, लेकिन इसके बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। -गोपाल शर्मा, जनसम्पर्क अधिकारी, रेलवे, जोधपुर

rajendra denok Reporting
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