बड़ा सवाल : रायपुर में दर्जनों कॉलोनियां, ... तो मिल कॉलोनी पर ही टारगेट क्यों?

- तत्कालीन तहसीलदार के वायरल पत्र की खबर छपने के बाद छाया रहा प्रकरण
- कृषि भूमि का आवासीय में करवाया था संपरिवर्तन

By: Suresh Hemnani

Updated: 03 Jul 2021, 08:35 AM IST

पाली/रायपुर मारवाड़। पाली जिले के रायपुर उपखंड मुख्यालय हरीपुर रोड पर स्थित मिल कॉलोनी ( अब भगवती कॉलोनी) का मामला न केवल पेचिदा है, बल्कि इसमें गड़बड़ी की बू भी आ रही है। इधर, तत्कालीन तहसीलदार के वायरल पत्र की खबर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित होने के बाद प्रकरण छाया रहा। रायपुर उपखण्ड और तहसील कार्यालय में भी शुक्रवार को हडक़ंप मच गया। मजे की बात यह है कि रायपुर में ऐसी दर्जनों कॉलोनियां काटी हुई है, लेकिन सिर्फ मिल कॉलोनी पर ही यह मशक्कत हुई है। तत्कालीन तहसीलदार के पत्र में भी इसका जिक्र किया गया है।

सरहद मौजा रायपुर द्वितीय के खसरा नंबर (1849/1,1849/3,1849/5,1849/7,1849/8,1849/10,1849/11,1849/12,1849/13) में करीब 15 बीघा कृषि भूमि पर नौ खातेदारों ने मिलकर तत्कालीन तहसीलदार से भूमि को आवासीय इकाई में संपरिवर्तन करवाया था। इसके बाद भूखण्ड काटकर इसे कॉलोनी का रूप दे दिया। नियमानुसार आवासीय इकाई को भूखण्डों में नहीं बेचा जा सकता, बल्कि पूरी जमीन को एकमुश्त ही बेचा जा सकता है। वर्तमान में इस भूमि का आवासीय व व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। कॉलोनी में करीब 100 भूखण्ड काटकर बेचे गए, जिसमें कुछ लोगों के मकान भी बने हुए हैं। कुछ मकान निर्माणाधीन है।

भूखण्ड धारक को नहीं मिली एनओसी तो चर्चित हुआ प्रकरण
एक व्यक्ति ने यहां भूखण्ड खरीद रखा है। निर्माण के लिए उसने ग्राम पंचायत से एनओसी के लिए आवेदन किया। पंचायत ने यह कहते हुए एनओसी देने से मना कर दिया कि आवासीय इकाई में निर्माण की अनुमति नहीं है। ऐसे में एनओसी जारी नहीं की जा सकती। एनओसी नहीं मिलने पर भूखण्ड धारक ने जिला कलक्टर समेत उच्च अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद से ही यह प्रकरण चर्चा में आया।

ऐसे फर्क समझें आवासीय कॉलोनी व आवासीय इकाई में
राजस्व नियमों के अनुसार आवासीय कॉलोनी के प्रयोजनार्थ संपरिवर्तन करवाने पर साढ़े सात रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से राजस्व राशि देनी पड़ती है। कॉलोनी काटने पर 40 प्रतिशत भूमि को मूलभूत सुविधाओं के लिए आरक्षित रखना होता है। जैसे रास्ता, गार्डन, धार्मिक स्थल, स्कूल, हॉस्पिटल इत्यादि। जबकि आवासीय इकाई में पांच रुपए प्रति वर्ग मीटर संपरिवर्तन राशि चुकानी होती है तथा मूलभूत सुविधाओं के लिए 40 प्रतिशत भूमि आरक्षित रखने की भी आवश्यकता नहीं रहती। इसका उपयोग खातेदार निजी उपयोग कर सकते हैं। कॉलोनाइजर इसका फायदा उठाकर सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाते हैं। यदि कोई व्यक्ति कृषि भूमि में अकृषि कार्य करता है तो तहसीलदार द्वारा 177 की कार्रवाई कर उसे रोक दिया जाता है। जबकि मिल कॉलोनी तो आवासीय इकाई में संपरिवर्तन सुदा है। ऐसे में 117 की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

धारा 177 की कार्रवाई का दावा खारिज
तत्कालीन तहसीलदार ने मिल कॉलोनी का प्रकरण धारा 177 व 212 में कार्रवाई के लिए उपखण्ड अधिकारी के यहां पेश किया था। उपखण्ड अधिकारी ने इस प्रकरण को 16 जून को खारिज कर दिया था।

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