scriptCattle distraught with hunger with thirst, shepherds upset | प्यास के साथ भूख से व्याकुल मवेशी, महंगाई से चरवाहे परेशान | Patrika News

प्यास के साथ भूख से व्याकुल मवेशी, महंगाई से चरवाहे परेशान

- जिले में सूखे चारे व कुतर का संकट
- खाखले व कुतर के दाम तीन गुना तक बढ़े

पाली

Published: April 27, 2022 08:35:00 pm

पाली @ पत्रिका। जिले के सबसे बड़ जवाई बांध के रीतने से जल संकट गहराया हुआ है। आमजन को पेयजल मुहैया कराने के तो जतन किए जा रहे है, लेकिन मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। उनको खारा पानी तक पिलाने को पशुपालक मजबूर है।
दूसरी तरफ गोवंश व भैंसों के लिए खाखले व कुतर की व्यवस्था करना भी पशुपालकों के साथ गोशाला संचालकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। सूखे के कारण क्षेत्र में किसी भी जगह पर खाखला व कुतर आसानी से नहीं मिल रही।
ऐसे में यह हरियाणा, पंजाब व मध्यप्रदेश आदि से मंगवानी पड़ रही है। जिससे इसके दाम तीन गुना तक बढ़ गए है।
खाखला 12 रुपए किलो तक पहुंचा
मवेशियों के लिए सबसे निम्न स्तर का भोजन खाखला माना जाता है। इसके दाम पहले पांच रुपए प्रति किलो तक थे। जो अब बढ़कर 12 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए है। ज्वार की कुतर जो पहले 8-8.50 रुपए प्रति किलो तक बिक रही थी। उसके दाम भी 15 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए है। इतने दाम बढऩे के कारण जिले के पशुपालकों के सामने संकट छा गया है।
जिले में 2019 में हुई 20वीं पशु गणना के अनुसार मवेशी
गोवंश: 3 लाख 60 हजार 871
भैंस: 3 लाख 29 हजार 807
गोशाला : 216
अनुदान बढ़े तो बने बात
प्यास के साथ भूख से व्याकुल मवेशी, महंगाई से चरवाहे परेशान
प्यास के साथ भूख से व्याकुल मवेशी, महंगाई से चरवाहे परेशान
सरकार की ओर से गोशालाओं को छह माह बड़ी गाय के लिए 40 रुपए व बछड़ों के लिए 20 रुपए अनुदान दिया जाता है। इस समय खाखले व कुतर के दाम बहुत बढ़ गए है। इन बढ़े दामों पर भी खाखला उपलब्ध नहीं हो रहा है। सरकार को अनुदान बढ़ाने के साथ इसकी अवधि छह के स्थान पर नौ माह करनी चाहिए। - बजरंगलाल हुरकट, अध्यक्ष, केशव नगर गोशाला
एक्सपर्ट व्यू:
बरसात की कमी के कारण क्षेत्र में गेहूं की फसल नहीं हुई। खरीफ की फसल में भी चारा उत्पादन अपेक्षा के अनुरुप नहीं हो सका। इस कारण सूखा चारा (खाखला व कुतर आदि) क्षेत्र में कम है। इस समय खाखला के लिए पशुपालक मध्यप्रदेश, हरियाणा व पंजाब आदि पर निर्भर हो गए है। वहां से भी इसकी आवक कम हो रही है। जबकि हमारे क्षेत्र में मवेशियों की संख्या के आधार पर मांग अधिक है। इस कारण दाम में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है।
डॉ. मनोज पंवार, उपनिदेशक, पशुधन विकास, पाली

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