यहां प्रतिदिन खर्च हो रहे लाखों रुपए, फिर भी नहीं धुल रहा कुपोषण का दाग, जिले में 9 हजार बच्चे कुपोषित

- आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आ रहे तीन से छह वर्ष तक के 92 हजार 793 बच्चे
- पोषाहार पर प्रतिदिन खर्च हो रहे छह लाख से अधिक

By: Suresh Hemnani

Published: 05 Sep 2019, 03:45 PM IST

-ओम टेलर
पाली। बच्चों में कुपोषण मिटाने के लिए राज्य सरकार पोषाहार सहित विभिन्न योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। आंगनबाड़ी के जरिए बच्चों को पोषाहार देने पर प्रतिमाह डेढ़ करोड़ से ज्यादा राशि खर्च की जा रही। उसके बाद भी जिले में नौ हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखरी इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने के बाद भी कुपोषण क्यों नहीं मिट रहा। इस राशि से आखिर किसका पोषण हो रहा है।

जिले में समेकित बाल विकास सेवाएं विभाग के माध्यम से 1819 आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे है। इनमें तीन से छह वर्ष तक के 43 हजार 912 बालक व 48 हजार 881 बालिकाएं आती है। जिन्हें स्कूल पूर्व शिक्षा के साथ पोषाहार दिया जाता है। इसे बावजूद 9 हजार 251 बच्चे कुपोषण की चपेट में है। जबकि 17 बच्चे अतिकुपोषित है।

एक बच्चे के लिए देते 6.5 रुपए
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सूखा पोषाहार के तहत प्रतिदिन 55 ग्राम गुड़-चना/फुली,चना, गुड़ या 50 ग्राम हलुआ सप्ताह में दो-दो दिन दिया जाता है। गर्म पोषाहार में प्रतिदिन 50 ग्राम मूंग-चावल खिचड़ी या मीठा दलिया दिया जाता है। प्रति बच्चे प्रतिदिन 6.5 रुपए खर्च होते हैं। जिले में प्रतिमाह पोषाहार देने पर एक करोड़ 50 लाख 78 हजार 862 रुपए खर्च किए जा रहे है।

स्टॉफ की कमी से आ रही परेशानी
आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषाहार देने सहित कुपोषण निवारण केन्द्र पर उपचार के लिए भेजने की कार्रवाई करते हैं। स्टॉफ की समस्या से सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। - भागीरथ चौधरी, उपनिदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं, पाली

Suresh Hemnani
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned