scriptCM Ashok Gehlot reached the condolence meeting held at Nimbol in Pali | मुख्यमंत्री के संकेतों से स्थानीय नेताओं में खलबली, सुर्खियों में गहलोत-गोयल की मंत्रणा | Patrika News

मुख्यमंत्री के संकेतों से स्थानीय नेताओं में खलबली, सुर्खियों में गहलोत-गोयल की मंत्रणा

-पाली जिले के जैतारण क्षेत्र के निम्बोल गांव आए थे मुख्यमंत्री

पाली

Published: October 29, 2021 09:03:16 am

पाली। जिले के जैतारण क्षेत्र के निंबोल में कांग्रेस नेता के निधन पर श्रद्धांजलि देने आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पाली में कांग्रेस को पटरी पर लाने के संकेत दिए हैं। निंबोल में मुख्यमंत्री गहलोत, प्रदेश प्रभारी अजय माकन और पूर्व मंत्री सुरेन्द्र गोयल के बीच लंबी मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री गहलोत ने खुद गोयल की पैरवी करते हुए प्रभारी माकन से कहा है कि वे उन्हें जिम्मेदारी दें, ताकि कांग्रेस मजबूत हो सके। इधर, गहलोत, माकन और गोयल की मंत्रणा के बाद जिलाध्यक्ष समेत विभिन्न पदों की दौड़ में शामिल स्थानीय कांग्रेस नेताओं में खलबली मच गई है।
मुख्यमंत्री के संकेतों से स्थानीय नेताओं में खलबली, सुर्खियों में गहलोत-गोयल की मंत्रणा
मुख्यमंत्री के संकेतों से स्थानीय नेताओं में खलबली, सुर्खियों में गहलोत-गोयल की मंत्रणा
दरअसल, श्रद्धांजलि सभा के बाद मुख्यमंत्री गहलोत, प्रभारी माकन, प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा हैलीपेड के निकट राजकीय स्कूल में लगे टेंट में कुछ देर के लिए ठहर गए। यहां मुख्यमंत्री के लिए अलग से रुकने की व्यवस्था की हुई थी। मुख्यमंत्री ने यहीं पर पूर्व मंत्री सुरेन्द्र गोयल की प्रदेश प्रभारी माकन से मुलाकात कराई। गहलोत ने यह भी कहा कि गोयल अनुभवी राजनेता है तथा कई पदों पर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए तो पार्टी को फायदा होगा। गौरतलब है कि गोयल भाजपा के बड़े नेता रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिलने से उन्होंने भाजपा छोडकऱ कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
गुटबाजी हावी, दावेदार कई
पाली में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है। इसी कारण पिछले एक दशक से हर चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ रहा। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त खानी पड़ रही। स्थानीय पार्टी नेताओं में आपसी मनमुटाव गहराई पहुंचा हुआ है। फिलहाल, पार्टी की कमान भी किसी के हाथ में नहीं है। यों तो पार्टी अध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार दौड़ में है, लेकिन गुटबाजी और खींचतान के कारण सहमति बनने के भी आसार नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री के प्रयास नए समीकरणों की तरफ इशारा कर रहे हैं।
कांग्रेस को नए तुरूप की तलाश
कांग्रेस को भी स्थानीय स्तर पर नए तुरूप के पत्ते की तलाश है। गुटबाजी के कारण किसी एक नाम पर सहमति ही नहीं बन रही। हर दावेदार की खिलाफत करने वाले भी बड़ी संख्या में है। ऐसे में पार्टी को नए खवैये की तलाश है ताकि संगठन को फिर से मजबूती से खड़ा किया जा सके।

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