scriptConsidering 1973 gauge asbasis, water is being given from Jawai Dam | 49 साल में पानी के साथ बढ़ती रही सिल्ट, बांध का गेज घटा, पीने को पानी भी कम मिला | Patrika News

49 साल में पानी के साथ बढ़ती रही सिल्ट, बांध का गेज घटा, पीने को पानी भी कम मिला

-1973 के गेज को आधार मानकर ही बांध से दिया जा रहा पेयजल
-सिंचाई विभाग के गेज के आकलन से हुआ खुलासा
-सिल्ट से घटा गेज, वर्ष 2009 से इस बार 54 एमसीएफटी पानी कम ले सके
-जवाई बांध बनने के बाद आज तक वापस नहीं किया जा सका गेज का माप

पाली

Updated: June 11, 2022 04:16:58 pm

-राजीव दवे
पाली। पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख पेयजल स्रोत में शुमार जवाई बांध का निर्माण वर्ष 1956 में पूरा हो गया। लेकिन, इसकी भराव क्षमता बढ़ाने 1973 में 1.25 फीट गेज बढ़ाया गया। ताज्जुब की बात ये है कि इसके बाद से लेकर अब तक वर्ष 1973 के गेज को आधार मानकर ही बांध से पेयजल लिया जा रहा है। जबकि गेज बढ़ाने के बाद 49 साल में बांध में पानी के साथ लगातार सिल्ट आती रही है और बांध का गेज कम होता रहा है। इस बात को इससे समझा जा सकता है कि वर्ष 2009 में जलदाय विभाग ने जल संकट के समय डेड स्टोरेज का पानी लेना जब बंद किया तो 270 एमसीएफटी पानी बांध में था। इस बार यह पानी 324 एमसीएफटी पानी रहते बंद कर दिया गया। इसका मतलब है करीब 54 एमसीएफटी पानी कम मिला। यदि वर्ष 2002 में लिए गए पानी का आंकलन करें तो उससे करीब 70 एमसीएफटी पानी कम मिला। इतने पानी में रोजाना चार एमसीएफटी पानी लेने पर करीब 18-20 दिन अधिक जलापूर्ति की जा सकती थी।
49 साल में पानी के साथ बढ़ती रही सिल्ट, बांध का गेज घटा, पीने को पानी भी कम मिला
जवाई बांध का नजारा
पहली बार सिंचाई विभाग करवा रहा गेज का आंकलन
जवाई बांध बनने के बाद 50 से अधिक सालों में इसमें कितनी सिल्ट जमा हुई और कितना गेज कम हुआ। इसका पहली बार अब आकलन शुरू करवाया गया है। सिंचाई विभाग बांध के अलग-अलग जगहों पर गेज का माप करवा रहा है। जिससे वर्तमान में बांध की पानी भराव की क्षमता का पता लग सके।
डेड स्टोरेज का नहीं लगेगा पता
बांध के गेज की स्थित पता करने की कवायद भले ही शुरू की गई है, लेकिन उसके डेड स्टोरेज (बांध का सबसे गहरा तल) में कितनी सिल्ट जमा है। इसका पता अब भी नहीं लग सकेगा। इसका कारण यह है कि डेड स्टोरेज में जीवों के लिए पानी है और उसमें उतरकर नाप करना संभव नहीं है।
गेज पता लगने पर हो सकता है लाभ
पेयजल के लिए बांध के नीचे के स्तर का पानी उपयोग आता है। पुराने गेज से पेयजल के लिए पानी लेना तय करने पर गेज घटने जितना पानी कम मिलता है। सही गेज का पता लगने पर उतना अधिक पानी मिल सकता है। इससे पेयजल संकट से थोड़ी राहत मिल सकती है।
नाप करवा रहे है
जवाई बांध में जमा सिल्ट और बांध की वर्तमान भराव क्षमता का इस बार बांध सूखने के कारण आंकलन करवा रहे हैं। डेड स्टोरेज में कितनी सिल्ट जमा है। इस बारे में भी पता करने का प्रयास किया जाएगा। -मनोज जैन, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, पाली
जवाई बांध एक नजर में
-13 मई 1946 को जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेदसिंह ने करवाया जवाई बांध का निर्माण
-वर्ष 1956 को बांध का निर्माण पूरा हुआ
-60 फीट था शुरू में गेज
-वर्ष 1973 में बढ़ाया गया बांध का गेज
-61.25 फीट हो गई थी गेज बढ़ाने पर क्षमता
-7327.50 मिलियन घट फीट थी भराव क्षमता

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