scriptDrinking water crisis in rural areas of Pali Rajasthan | यहां पानी सबसे बड़ी जंग हो गई, हर कोई जीतना चाहता है | Patrika News

यहां पानी सबसे बड़ी जंग हो गई, हर कोई जीतना चाहता है

- ग्रामीण इलाकों में पानी के हालात बिगड़े
- गहराया पेयजल संकट, कोई समाधान नहीं
- पेयजल हालात सुधारने के सभी दावे झूठे

पाली

Updated: March 28, 2022 01:18:07 pm

पाली। पाली के निकट ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट गर्मी आते ही गहरा गया है। प्रशासन व जलदाय विभाग का दावा झूठा है कि उन्होंने पानी के लिए कोई व्यवस्था कर रखी है। हालात यह है कि पानी सबसे बड़ी जंग हो गई है, जिसे हर कोई जीतना चाहता है। पाली की किल्लत से हालात इतने खराब हो रहे है कि पानी के लिए कई जतन करते पड़ रहे है। पाली शहर के निकट राऊनगर में ग्रामीणों तालाब के बीच गड्डा खोदकर कुएं का रूप देकर उस पानी से अपनी व मवेशियों की प्यास बुझा रहे है। रात में लोग नींद नहीं लेकर गांव के लोग जलदाय विभाग की हौदी पर पानी लेने आते हैं, बच्चे व महिलाएं दो से तीन किलोमीटर का गर्मी में पैदल सफर कर जरीकेन भरकर पानी ले जाते हैं, दिनभर यही मशक्कत करनी पड़ती है। छोटे गड्डे में जहां भी पानी दिख जाए, महिलाएं इसकी जुगत में जुट जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कहीं पर भी पानी नहीं है। पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जहां थोड़ा बहुत पानी दिखता है। वहां पर ही भरने लग जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी परवाह किसी को नहीं है।
यहां पानी सबसे बड़ी जंग हो गई, हर कोई जीतना चाहता है
यहां पानी सबसे बड़ी जंग हो गई, हर कोई जीतना चाहता है
दूषित व मटमेला पानी भी चलेगा, मजबूरी
पाली मुख्यालय के निकट रूपावास राऊ नगर में एक गड्डे में मटमेला पानी पिछले कई दिनों से भरा है। गांव में दूसरी जगह पानी नहीं है। ऐसे में ग्रामीण सभी परवाह छोड़ इसी पानी को पीने व जुटाने में जुट गए हैं। यहां भीड़ रहती है। इस पानी पीने से शरीर में क्या दुष्परिणाम होंगे, यह पता नहीं है, लेकिन ऐसा पानी पीना उनकी मजबूरी है। क्याेंकि गांव में दूसरी जगह पानी नहीं है।
पानी के लिए झगड़ा, माहौल खराब होने की नौबत
गिरादड़ा, रूपावास, राऊ नगर, भाटो की ढाणी, मुलियावास, दयालपुरा, गुरड़ाई, भांवरी सहित आसपास के गांवों में पानी की भारी किल्लत है। यहां पानी के लिए आए दिन ग्रामीणों में झगड़े हो रहे हैं, इससे माहौल भी खराब हो रहा है। जलदाय विभाग की ओर से गिरादड़ा सहित आसपास के गांवों में आठ दिन से पानी आता है, वह भी आधे घंटे ही, ऐसे में पानी भरने के लिए जीएलआर पर झगड़े होते है।

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