VIDEO : ये कैसी चौकसी! सालों बाद भी पता नहीं लगा पाए कि नालों में कौन छोड़ रहा रंगीन पानी

प्रदूषण का दंश:

By: Suresh Hemnani

Published: 02 Mar 2021, 09:29 AM IST

पाली। नगर परिषद के नालों में रंगीन पानी रोजाना बह रहा है, वह भी सालों से। फिर भी जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नगर परिषद यह पता नहीं लगा पाए कि आखिर कौन रंगीन पानी सीवरेज लाइनों में छोड़ रहा है। ताज्जुब यह भी है कि सालों से बैठकों में निर्देश दिए जाते हैं कि चोरी-छिपे नालों में रंगीन पानी छोडऩे वाली कपड़ा इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, लेकिन कार्रवाई तो दूर की बात, यह भी पता लगाने में कामयाब नहीं हुए कि यह हिमाकत कौन कर रहा है, जिससे पूरा कपड़ा उद्योग बदनाम है।

राजस्थान पत्रिका ने नालों में बहते रंगीन पानी को लेकर लगातार आवाज उठाई है। सोमवार को शहर के विभिन्न स्थलों पर फिर पड़ताल की, जिसमें हालात ऐसे ही नजर आए। नगर परिषद के कई नालों में रंगीन पानी बहता नजर आया। औद्योगिक क्षेत्र प्रथम व द्वितीय एवं मंडिया रोड क्षेत्र में ऐसे ही हालात दिखे। यही पानी बांड़ी नदी में पहुंच रहा है, जबकि दावा यह किया जा रहा है कि औद्योगिक इकाइयों का एक बूंद पानी भी नदी में बहाया जा रहा।

समस्या पुरानी, अब पता लगा रहे
यह समस्या पुरानी है। नालों में रंगीन पानी अक्सर दिखता है। पानी के सैंपल जांच कराए उसमें भी खुलासा हुआ है। यह पानी कहां से आ रहा है इसका आज तक पता नहीं चल पाया। अब नगर परिषद को जिम्मेदारी दी है कि ऐसे पाइंट चिन्ह्ति करें जहां से रंगीन पानी परिषद के नालों में शामिल हो रहा। परिषद की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई करेंगे। -आर के बोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पाली

सर्वे में खुलासा : 23 इकाइयों के आउटलेट नदी में
पाली। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने बांडी नदी पर आबाद कपड़ा इकाइयों का सर्वे किया है। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नदी किनारे चल रही 23 कपड़ा इकाइयों का आउटलेट नदी में पाया गया है। यानि, रंगीन पानी खुलेआम नदी में बहाया जा रहा । अब जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने इन इकाइयों को अगले तीन दिन में आउटलेट बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नदी की तरफ दीवार पर पेंट करने की भी हिदायत दी है। यह सर्वे अगले दिनों में भी जारी रहेगा।

जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीमों द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया कि नदी के किनारे बसी इकाइयों के आउटलेट नदी में बने हुए हैं। टीमों ने सभी इकाइयों को तत्काल आउटलेट बंद करने के निर्देश दिए। तीन दिन बाद यदि किसी इकाई का आउटलेट बंद नहीं हुआ तो इकाई को बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी। मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी आर के बोड़ा ने बताया कि सभी इकाई मालिकों को आगाह कर दिया है। अगले तीन दिन में सुधार नहीं किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एनजीटी की बैठक में फिर सख्ती दोहराई
अतिरिक्त जिला कलक्टर चन्द्रभानसिंह भाटी ने नदी किनारे गैर उपचारित केमिकल युक्त पानी को सीधे नदी में मिलने से रोकने के लिए नदी किनारे की फोटोग्राफी कराने और स्थल चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।

कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से चोरी छीपे रंगीन केमिकल युक्त पानी अवैध टैंकरों से डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह गंभीर विषय है। उन्होंने अवैध टैंकरों के परिचालन मार्ग का पता लगाने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई करने एवं पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने रीको के अधिकारियों को चयनित स्थानों पर रोको का नियमित रख रखाव रखने तथा निरीक्षण करने के निर्देश दिए। बैठक में रीको के नालो में आ रहे रंगीन पानी की जांच के लिए नियमित सैंपलिंग कर अवैध रंगीन पानी के डिस्चार्ज के स्रोत का पता लगाने संबंधी निर्देश दिए गए।

बैठक में उपखण्ड अधिकारी उत्सव कौशल, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी आर के बोड़ा, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक रज्जाक अली, रीको के पी के गुप्ता, एसीइओ शक्तिसिंह भाटी, तहसीलदार पंकज जैन, डिस्कॉम के अधिशाषी अभियंता मनीष माथुर, जिला परिवहन अधिकारी राजेन्द्र दवे व उप निदेशक कृषि विस्तार जितेन्द्रसिंह शक्तावत समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

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