scriptEyes wet on Krishna-Sudama affair, devotees became emotional | कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर भीगी आंखें, भावुक हुए श्रद्धालु | Patrika News

कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर भीगी आंखें, भावुक हुए श्रद्धालु

- आखण्डी ढाणी में मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

पाली

Published: April 09, 2022 08:59:35 pm

बगड़ी नगर। आखंडी ढ़ाणी में भगवान देवनारायण मंदिर प्राण प्रतिष्ठा व महायज्ञ के आठ दिवसीय महोत्सव के तहत भागवत कथा में शुक्रवार को काशी के संत मनोहरदास महाराज ने कृष्ण सुदामा मिलन का प्रसंग सुनाया। भावुक पलों को याद कर श्रद्धालुओं की आंखें भीग गई। संत ने कहा कि जब तक जीव भगवान के शरणागत नहीं हो जाता है तब तक भगवान भी उसके प्रति समर्पित नहीं होते हैं। जो भगवान के प्रेमर स में डूबे थे वो सभी गोकुल में गोपगोपियों के रूप में जन्म लिया था। ये गोपियां अपने सभी रूपों में भगवान को ही मानती थी। उन्होंने कहा कि भगवान संत रूप में ही मिलते हैं, इसलिए संतों के दर्शन से सभी पाप धुल जाते हैं। इस दौरान संत के साथ भजन मंडली ने बड़ा बेचैन हूं तुम बिन, जरा देखो इधर आकर । मेरे प्राणेश मनमोहन तुम्हे ढुढूं कहां जाकर आदि सुन्दर भजन सुनाए। जिस पर पंडाल में श्रोता व महिला श्रद्धालु झूम उठे।
आज ये होगें कार्यक्रम
समारोह के तहत शनिवार को पूर्णाहुति महोत्सव में बोली के लाभार्थी परिवार व पण्डितों के मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से मूर्ति स्थापना के साथ ही मंदिर में देवनारायण विराजमान होंगे। इसके साथ ही शिखर पर कलश इण्डा की स्थापना व अमर ध्वजा रोहण किया जाएगा। इस मौके पुष्पवर्षा की बोली के लाभार्थी परिवार द्वारा हेलिकॉप्टर से मंदिर शिखर व प्रांगण में पुष्पवर्षा की जाएगी। उसके पश्चात महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा।
कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर भीगी आंखें, भावुक हुए श्रद्धालु
कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर भीगी आंखें, भावुक हुए श्रद्धालु
संतों का बधावना

महोत्सव में आमंत्रित आङ्क्षसद स्थित अंतराष्ट्रीय मंदिर सवाई भोज धाम के महंत सुरेशदास महाराज, पीपलाद जानराय मंदिर के मुख्य पुजारी मंगला महाराज सहित संतों का वरघोडा निकाल कर सम्मान कथा पंडाल में ले जाया गया। जहां व्यास पीठ पर संत मनोहरदास महाराज ने बहुमान करते हुए आसन पर विराजित किया।
मोबन स्थापना
महोत्सव के सातवें दिन मंदिर प्रांगण में मोबन रोपने की रस्म निभाई गई। जिसके लाभार्थी जयराम, मलाराम व रामचन्द्र कुराच पुत्र चुन्नीलाल गुर्जर परिवार ने प्रधान अचार्य सुरेश कुमार दवे, सह आचार्य पकंज कुमार दवे व मनीष दवे के आचार्यत्व में मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से करवाई। यज्ञशाला में यजमानों ने आहुतियां देकर हवन कार्य करने के बाद मूर्ति संस्कार के तहत फलादिवास, फुलोदिवास, मिष्ठाानाधिवास, जलाधिवास आदि श्रृंगार किए गए।

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