जैतपुरा में विश्व का पहला श्रीयंत्र आकार का है उतुंग, चतुर्मुख है यहां जिन प्रसाद

पर्युषण पर्व विशेष :
-गच्छाधिपति आचार्य नित्यानंद सूरिश्वर को वर्ष 1999 में इस स्थान पर जिनालय बनाने के मिले थे संकेत

By: Suresh Hemnani

Updated: 07 Sep 2021, 05:11 PM IST

पाली/गुंदोज। पाली से करीब 35 किमी दूर अहमदाबाद फोरलेन पर जैन समाज का तीर्थ जैतपुरा गांव में है। इस जगह पर श्री विजय वल्लभ साधना केन्द्र तीर्थ बनाने के संकेत गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरिश्वर को वर्ष 1999 में खौड़ में चातुर्मास करते समय मिले थे। इसके बाद इसका निर्माण कराया गया। माना जाता है कि यह विश्व का पहला जिनालय है जिसका उतुंग (मंदिर का ऊपरी हिस्सा) श्री यंत्र आकार का बनाया गया है। जिनप्रसाद चतुर्मुख आकार का है। जो अब जैन समाज सहित क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण व आस्था का केन्द्र बन चुका है। इस स्थान पर वर्तमान में गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरिश्वर, आचार्य जयानंद सूरिश्वर, गणिवर्य जयकीर्ति विजय सहित संत व साध्वियां चातुर्मास कर रहे हैं।

पाली का एक मात्र जिनालय जिसमें स्टेच्यू ऑफ पीस का प्रधानमंत्री ने किया अनावरण
आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि ने आत्म शांति के मार्ग को स्वीकार किया था। जैन धर्म के प्रचार के साथ विश्व में मानवता, बंधुत्व, अहिंसा के साथ शांति का मार्ग बताया। उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा, कुरीतियों व कुप्रथाओं के उन्नमूलन का कार्य किया। कविता, स्तवनों, निबंध सहित हजारों भक्ति रचनाओं जैसे साहित्य की रचना की। उनके कार्यों व संदेश को प्रचारित करने के लिए साधना केन्द्र में स्टूच्यू ऑफ पीस की स्थापना की गई। स्टेच्यू का पाली जिले में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 नवम्बर 2020 को वर्चुअल तरीक से अनावरण किया था। यह प्रतिमा अष्ट धातू की बनी है।

ये प्रतिमाएं हैं भगवान की
जिनालय में मूलनायक भगवान संभवनाथ के साथ आदिश्वर भगवान, शंखेश्वर पाŸवनाथ भगवान, भगवान महावीर स्वामी, प्रथम गणधर गौतम स्वामी, गणधर सुधर्मा स्वामी विराजमान है। गुरु मंदिर में आचार्य विजय समुद्र सुरि, आचार्य इन्द्रदत्र सुरि के अलावा नाकोड़ा भैरव, मणिभद्र वीर, माता चक्रवेश्वरी देवी, माता पद्मावती विराजमान है।

यह हो चुके हैं मुख्य कार्यक्रम
-आचार्य विजय बंसत सूरिश्वर के 46वें व 47वें वर्षीतप का पारणा
-आचार्य विजय जयानंद सूरिश्वर की पंन्यास व आचार्य पदवी
-आचार्य विजय चिदानंद सूरिश्वर की पंन्यास व आचार्य पदवी
-मुनि पुण्यानंद विजय की बड़ी दीक्षा
-मुनि तत्वानंद विजय, मुनि ज्ञानानंद विजय, साध्वी दर्शन प्रज्ञा की भागवती दीक्षा

Suresh Hemnani
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