पाली का हुनर : गज ने कोसेलाव गांव को दिलाई देश में नई पहचान

-दादा की विरासत को संभाल रहा पोते
-मकान निर्माण में काम आते है गज

Suresh Hemnani

January, 2005:00 PM

पाली/पावा। जिले के कोसेलाव गांव को भवन निर्माण में उपयोग किए जाने वाले गज ने नई पहचान दिलाई है। यहां से ये गज देश के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाते हैं। कोसेलाव निवासी गिरधारीलाल मालवीय लुहार गांव में ट्रैक्टरों की मरम्मत करते थे। इसके बाद उन्होंने गज बनाने का कार्य शुरू किया। वर्ष 1996 में उनके निधन के बाद पोते गोपाल ने काम को आगे बढ़ाया।

हालांकि गोपाल के पिता नारायणलाल मालवीय लुहार ने यह कार्य न हीं किया। उन्होंने मशीनरी का कार्य करते हुए बेटे के लिए गज बनाने की मशीन भी घर पर बनाई। पहले गज हाथ से ही बनाते थे बाद में गोपाल ने इस पर अंक लगाने के लिए कंप्यूटरीकृत मशीन खरीदी। इस मशीन से अब गज पर अंक लिखे जाते हैं। गोपाल के दो भाई लोहे की जालियों का निर्माण करते है।

इन साइजों के बनाते हैं गज
गोपाल 2 गुणा 1 फीट, 3 गुणा 2 फीट, 4 गुणा 2 फीट,18 इंच गुणा 9 एवं 12 इंच गुणा 6 इंच के गज बनाते हैं। जिनकी देश-विदेश में मांग है।

हर क्षेत्र में गज का नाप होता है अलग
बंगाल में 36 इंच (91.44 सेमी.), मुम्बई में 27 इंच (68.58सेमी.) चेन्नई में 33 इंच (82.84 सेमी.) व सरकारी सर्वेक्षण के लिए 3 इंच (83.82सेमी) के गज बनाए जाते है।

बहुत महत्व है
निर्माण के कार्य गज का बहुत महत्व है। मेरे दादा ने गज बनाने के लिए हाथ से निर्माण शुरू किया था। आज इनकी पहचान बनी है। -गोपाल मालवीय, कोसेलाव

गिरधारी बा बनाते थे गज
हां, गिरधारीबा के गजों ने कोसेलाव को नई पहचान दी है। ये कोसेलाव के लिए गौरव की बात है। -नारायणसिंह, सरपंच, कोसेलाव।

Suresh Hemnani Desk
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