इशारों में काट रहे जेब!

निजी विद्यालयों में बच्चों को प्रवेश दिलाने के बाद सहयोग के नाम पर ली जाने वाली राशि के अलावा भी

By: मुकेश शर्मा

Published: 15 Apr 2016, 11:49 PM IST

पाली।निजी विद्यालयों में बच्चों को प्रवेश दिलाने के बाद सहयोग के नाम पर ली जाने वाली राशि के अलावा भी अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। वहां प्रवेश के बाद विद्यालयों के संचालक पुस्तक लाने, यूनिफार्म खरीदने और अन्य सामग्री खरीदने के लिए इशारों-इशारों में दुकान का पता अभिभावक को बताते हैं। अभिभावकों के वहां से यह सामग्री खरीदते हैं। इन दुकानों के अलावा बाजार में कहीं भी यह सामग्री नहीं मिलती है।  

अन्य कोई विकल्प नहीं

कई विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को दुकान का नाम नहीं बताया जाता, लेकिन विद्यालय की पुस्तकें शहर की एक या दो दुकानों पर ही मिल रही है। इसमें शहर के बड़े हिन्दी माध्यम के निजी विद्यालयों के साथ अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय भी शामिल हैं।   एेसे में अभिभावक को मजबूरी में पुस्तकें उन्हीं दुकानों से खरीदनी पड़ रही है और कमीशन की राशि निजी विद्यालयों के संचालकों तक पहुंच रही है।

क्या करें मजबूरी है

राइकों की ढाणी क्षेत्र निवासी नारायणलाल ने बताया कि मैं अपनी पोती का प्रवेश अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में करवाने गया। वहां माह का शुल्क ज्यादा था। इसके बाद पुस्तकों का पूछने पर पहली कक्षा में ही करीब 2000 रुपए पुस्तकों के बताए और दुकान भी। इस पर मैंने क्षेत्र के एक हिन्दी माध्यम विद्यालय में पोती को प्रवेश दिलाया। अभिभावक कैलाश ने बताया कि बच्ची एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ती है। बच्ची का प्रवेश कराने पर पुस्तकों के लिए कॉलेज रोड पर एक दुकान बताई गई थी। अब पिछले तीन वर्ष से वहां से पुस्तकें खरीद रहा हूं।

शिकायत करने पर करते हैं कार्रवाई

 हमारे मंच के पास दो-तीन अभिभावक एेसी शिकायत लेकर आए थे। इसका हमने विद्यालय जाकर समाधान करवाया था। अब हम अभिभावक चेतना कार्यक्रम आयोजित कर अभिभावकों को जागरूक  करने का कार्य करने वाले हैं। ललितेश कुलश्रेष्ठ, सचिव, जिला अभिभावक मंच, पाली

शिकायत ही नहीं मिली

 अभी तक एेसी कोई शिकायत नहीं मिली है। इस सम्बन्ध में शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी। जीवराज जाट, जिला शिक्षा अधिकारी  माध्यमिक,  पाली
मुकेश शर्मा Reporting
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