पढ़े : गोशाला खोली, ट्रस्ट बनाया और 20 साल में करवाया 15 लाख पशुओं का उपचार

- बेड़ा में संचालित हंजाबाई गोशाला पांजरापोल की कहानी

 

By: Avinash Kewaliya

Published: 04 Jan 2018, 02:44 PM IST

पाली. जिले का आदिवासी अंचल का गांव बेड़ा। यहां पिछले कई सालों से संचालित हो रही श्रीमती हंजाबाई गोशाला - पांजरापोल। इस गोशाला के संचालक मंडल से एक खास बात जुड़ी है। यह ट्रस्ट पिछले 20 साल में 320 पशु चिकित्सा शिविर और 15 लाख से अधिक पशुओं का उपचार करवा चुका है। यह सफर बिना किसी सरकार सहायता के भामाशाहों के भरोसे निरंतर जारी है। इस गोशाला के संचालक मंडल के अध्यक्ष हस्तीमल पुत्र दलीचंद जैन हैं, जो कि मूल रूप से बेड़ा के ही रहने वाले हैं और मुम्बई में व्यापार करते हैं। करीब 25 साल पहले एक प्राकृतिक आपदा के दौरान उन्होंने अपने मित्रों के साथ गुजरात का दौरा किया था। वहां अत्यधिक संख्या में पशु हानि देखी तो उनका मन पसीज गया। करीब 20 साल पहले उन्होंने पशु चिकित्सा शिविर और गोशाला की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह सफर बढ़ा और अब औसतन हर माह दो शिविर लगाकर करीब 4-5 हजार पशुओं का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। अब तक 320 शिविर लगाकर 15 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया गया और हजारों पशुओं की जान बचाई है।

एक शिविर का खर्च 2 लाख

इस गोशाला का संचालन करने वाली श्रीमती शकुंतला हस्तीमल कारसिया चेरिटेबल ट्रस्ट के शिविर संयोजक इंदरमल मुठलिया ने बताया कि एक शिविर पर करीब 2 लाख तक का खर्च आता है। इसमें गोशाला के करीब 15-20 कर्मचारी लगते हैं। इस शिविर का पूरा खर्च इस संबंधित गांव के भामाशाह और गोशाला की ओर से उठाया जाता है।

राज्य सरकार से मिलते हैं चिकित्सक

इस शिविर के लिए राज्य सरकार भी कुछ हद तक मदद करने लगी है। अध्यक्ष जैन बताते हैं कि जब भी शिविर लगाना होता है तो सरकार को एक पत्र देना होता है। जिस प्रदेश या जिले में यह शिविर लगना होता है वहां आस-पास से पशु चिकित्सक और कम्पाउंडर की टीम मुहैया करवाई जाती है।

राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में शिविर

इस ट्रस्ट की ओर से पशु चिकित्सा शिविर राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी लगाए गए हैं। एक शिविर न्यूनतम तीन दिन का होता है। इसमें पशुओं का स्वास्थ्य जांचने के साथ ऑपरेशन भी किया जाता है। तीन दिन के शिविर में औसतन 4 से 5 हजार पशुओं का उपचार किया जाता है।

 

Avinash Kewaliya
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