सरकार ने बिजली दरें बढाई, संसाधन पर नहीं ध्यान, चंदा एकत्रित करने की विवशता आज भी

- पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में चंदा एकत्रित कर करना पड़ता है वाहन का बंदोबस्त
- डिस्कॉम के पास संसाधन की कमी

By: Suresh Hemnani

Published: 07 Sep 2020, 09:31 AM IST

पाली/रायपुर मारवाड़। चंदा एकत्रित करने की बात जानकर आप जरूर चौक गए होंगे, लेकिन इस सच का सामना पहाड़ी क्षेत्र के गांवों के लोग पिछले कई वर्षो से करते आ रहे हैं। डिस्कॉम के पास संसाधनों की कमी है। जिससे ट्रांसफार्मर जल जाने के बाद नया ट्रांसफार्मर लाने के लिए ग्रामीणों को चंदा एकत्रित कर वाहन का बंदोबस्त अपने स्तर पर करना पड़ता है।

राज्य सरकार ने बिजली की दरें बढा आमजन की जेब पर अच्छा खासा असर डाल दिया है। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि वे डिस्कॉम को घाटे से उभारने का प्रयास कर रहे हैं। इधर, सरकार इसी महकमे में संसाधनों की कमी से जनता को हो रही परेशानी की तरफ ध्यान देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इससे जनता को दोहरी मार झोलनी पड़ रही है।

विवशता बन गई प्रथा
कुछ वर्षो पहले यह हालात थे कि डिस्कॉम के पास वाहन की कोई व्यवस्था नहीं थी। तब ग्रामीणों को पाली से नया ट्रांसफार्मर लाने के लिए चंदा एकत्रित कर वाहन लेकर पाली जाना पड़ता था। वहां से ट्रांसफार्मर लाने के बाद डिस्कॉमकर्मी कनेक्शन करते। चंदा एकत्रित करने में तीन से चार दिन लग जाते तो उन चार दिनों तक गांव अंधेरे में ही डूबा रहता था। अब डिस्कॉम ने सब स्टेशन तक अपने स्तर पर ट्रांसफार्मर पहुंचाने की व्यवस्था कर दी, लेकिन सब स्टेशन से गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाने के लिए चंदे वाली प्रथा को आज भी कायम रखा जा रहा है।

उठा कर ले जाना पड़ता है
पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे कई बाडि़ए हैं जहां ट्रैक्टर भी नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में जहां तक ट्रैक्टर या जीप पहुंचती है वहां तक ट्रांसफार्मर को ले जाया जाता है। वहां से पोल तक ग्रामीणों को ट्रांसफार्मर उठाकर ले जाना पड़ता है। इन हालातों की पुष्टि स्वयं डिस्कॉम अधिकारी भी कर चुके हैं।

गांव वाले ही लाते वाहन
हमारे पास मिनी ट्रक है। जिससे हम पाली से ट्रांसफार्मर मंगवा लेते हैं। जहां मिनी ट्रक नहीं पहुंच पाता है वहां ट्रैक्टर या जीप की व्यवस्था ग्रामीण अपने स्तर पर ही चंदा एकत्रित कर करते हैं। ये बात भी सही है कि पहाड़ी क्षेत्र के कुछ बाडि़ए ऐसे हैं जहां जीप या ट्रैक्टर भी नहीं पहुंच पाते। वहां ग्रामीणों को ही ट्रांसफार्मर उठाकर ले जाना पड़ता है। -गौरव गुप्ता, एइएन, डिस्कॉम, बर

Suresh Hemnani Desk
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