विजय दिवस: जब आइएनएस खुखरी ऑपरेशन में 174 नाविकों और 18 नौ सेना अधिकारियों ने देश के लिए दे दी थी जान

- पाली के दो नौ सैनिक भी हुए थे शहीद

By: Suresh Hemnani

Published: 16 Dec 2020, 08:18 AM IST

पाली। भारतीय सेना के शूरवीरों ने 1971 के युद्ध में शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस का परिचय दिया था। भारतीय जाबांजों की वीरता ने पाक को महज कुछ दिन में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसमें थल ही नहीं, वायु और नौ सेना के वीरों ने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी। ऐसी ही अनूठी कहानी है आइएनएस खुखरी ऑपरेशन की। इसमें 174 नाविक और 18 नौ सेना अधिकारी शहीद हो गए थे।

भारत-पाक के बीच 1971 का युद्ध जब शुरू हुआ तो नौसेना को अंदाजा था कि मुबई बंदरगाह को निशाना बनाया जा सकता है। 2 और 3 दिसम्बर की रात को नौसेना के पोत मुंबई से रवाना हो रहे थे। इस बीच, एक पाकिस्तानी पनडूबी दीव के निकट आसपास घूमती दिखी। जानकारी मिलते ही नौ सेना मुख्यालय ने आदेश दिया कि भारतीय जल सीमा में घूम रही पनडूबी को तत्काल उड़ा दिया जाए। इसके लिए एंटी सबमरीन फ्रिगेट आइएनएस खुखरी और कृपाण को तैनात किया गया। दोनों पोत 8 दिसम्बर को अपने मिशन पर पहुंच गए। अगले दिन सुबह-सुबह वहां पहुंच गए जहां पाकिस्तानी पनडूबी होने का संदेह था। पाकिस्तानी पोत हंगोर को कृपाण और खुखरी की गतिविधियों का पता चल गया था। हंगोर ने पहला टॉरपीडो कृपाण पर चलाया, लेकिन वह नीचे से गुजर गया।

दूसरा निशाना खुखरी को बनाया। खुखरी में तेज धमाका हुआ। देखते ही देखते आग की लपटें निकलने लगी। जहाज में दो छेद हो गए और तेजी से पानी भरने लगा। कई सैनिकों ने समुद्र में छलांग लगाई। 64 नाविकों की जान बचा ली गई। लेकिन कैप्टन मुल्ला ने जहाज छोडऩे से इनकार कर दिया। कुछ ही समय में खुखरी ने जल समाधि ले ली। कैप्टन मुल्ला भी पोत के साथ जल समाधिस्थ हो गए। इस ऑपरेशन में 174 नाविक और 18 अधिकारी शहीद हो गए। कैप्टन महेन्द्रनाथ मुल्ला को नौ सेना की सर्वोच्च परंपरा का निर्वहन करने के उपलक्ष में देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार महावीर चक्र (मरणोपरांत)से सम्मानित किया गया।

ये भी देश के लिए न्यौछावर कर गए प्राण
शहीद जोधाराम :
देसूरी तहसील के वरकाणा निवासी जोधाराम सेना के डेजर्ट कोर में कार्यरत थे। भारत-पाक युद्ध में अपनी वीरता और साहस का प्रदर्शन करते हुए 5 दिसम्बर 1971 को देश की रक्षार्थ शहीद हो गए थे।

शहीद जेठनाथ :
सोजत तहसील के खोडिया निवासी राइफलमैन जेठनाथ राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। 13 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेवा की सर्वोच्च परंपरा का निर्वाह करते हुए शहीद हो गए।

शहीद रामसिंह :
देसूरी तहसील के काकलावास निवासी रामसिंह राजपूताना राइफल्स में कार्यरत थे। 8 दिसम्बर 1971 को भारत-पाक युद्ध मेें दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिए।

पाली के दो नौ सैनिकों ने दी थी शहादत
ऑपरेशन खुखरी में पाली के दो नौ सैनिकों ने शहादत दी थी। रायपुर तहसील के भीला निवासी पूरणसिंह रावत और रायपुर क्षेत्र के झूठा निवासी जबरदान शहीद हो गए थे। दोनों ही आइएनएस खुखरी पर तैनात थे।

Suresh Hemnani
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