झुलसने लगी खरीफ की फसलें, अब अन्नदाता को इन्द्रदेव से आस

- कुछ दिनों पूर्व बोए बीज अंकुरित होकर झुलस रहे
- बारिश के अभाव में किसान चिंतित

By: Suresh Hemnani

Updated: 03 Jul 2021, 09:43 AM IST

पाली/बाबरा। बारिश की कमी और दिन में शुष्क हवाओं के चलने के साथ तेज धूप से क्षेत्र में खेतों में उगी खरीफ की फसल अब मुरझाने लगी है। कई खेतों में फसल की बिजाई को गत दिनों पहले हुई बारिश में बोई थी, तो कुछ फसलों की बुवाई दस दिन पहले की हुई है। अब बारिश के इंतजार में किसानों की आंखें पथराने लगी हैं।

रूपादेवी, राजूराम, जगदीश प्रसाद सहित किसानों ने बताया कि करीब 20 दिन पूर्व हुई बारिश के दौरान बाजरा, मूंग, चंवला, तिली, ग्वार व ज्वार की बुवाई की थी। अब तेज धूप व बारिश के अभाव में प्यासी फसल झुलसने लगी है। कुछ दिनों पहले अन्य खेतों में ग्वार, मूंग, मक्का की बुवाई कर चुके किसानों ने भी बताया कि बुवाई के समय खेत में नमी थी। लेकिन अब तेज धूप के साथ दिन में गर्म हवाएं चलने से खेत की नमी समाप्त होने व बरसात के नहीं होने से हल्के अंकुरित हुए बीज झुलस रहे हैं। समय पर बारिश नही हुई तो किसानों को नुकसान की आशंका सता रही है।

बारिश में देरी हुई तो होगा नुकसान
किसानों ने बताया कि खेतों में बाजरा, मूंग, तिली, ग्वार, मूंगफली, उड़द/मोठ, चंवला, मक्का आदि की बुवाई की है। बुवाई से पूर्व खेतों की खड़ाई के बाद बीज बुवाई, उर्वरक, बीज आदि की लागत के साथ बुवाई के लिए प्रतिघंटा आठ सौ से एक हजार रुपए टै्रक्टर का खर्च हुआ है। इसमें समय पर बारिश के अभाव में नुकसान होने के साथ पुन: बुवाई पर दोगुना नुकसान होने का भय सता रहा है।

फसलें झुलसने का खतरा
जिन क्षेत्रों में खरीफ की बुवाई हुई है। वहां अब बारिश की आवश्यकता है। बारिश के अभाव में मक्का, मूंग, दलहन व तिलहन की फसलेें झुलसने का खतरा है। हालांकि बाजरा, ज्वार व ग्वार आदि में गर्मी सह सकने वाली फसले हैं। मानसून पूर्व की छितराई बारिश से बाबरा सहित कई गांवों में खरीफ की औसत बुवाई हुई है। कई अन्य जगह पर अभी पर्याप्त बुवाई नहीं हुई है। -वर्षा फानन, सहायक कृषि अधिकारी

Suresh Hemnani
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