ऑनलाइन संवाद : शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शिक्षण संस्थान संचालकों ने साझा किए ये सुझाव, पढ़ें पूरी खबर

कोरोना महामारी : शिक्षा जगत के भविष्य को लेकर चिंतित शिक्षण संस्थान संचालक
-केन्द्र व राज्य सरकार से कई उम्मीदें

By: Suresh Hemnani

Updated: 18 Apr 2020, 07:23 PM IST

पाली। कोरोना महामारी [ Corona virus ] के नुकसान से शिक्षा जगत भी नहीं बच पाया है। स्कूल-कॉलेज पूरी तरह से लॉकडाउन [ Lockdown ] है। शिक्षण व्यवस्था ठप है। कई संस्थान विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन [ online study ] सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन संस्थानिक गतिविधियां बंद हो गई है। शिक्षा जगत के भविष्य को लेकर भी कई तरह के संशय बने हुए हैं।

कोरोना का असर भविष्य में शिक्षण व्यवस्था को किस तरह से प्रभावित करेगा और शिक्षा जगत को केंद्र व राज्य सरकार से क्या उम्मीदें हैं, इस पर राजस्थान पत्रिका ने पाली, जालोर व सिरोही के शिक्षण संस्थान संचालकों से ऑनलाइन संवाद [ Online communication ] किया। संचालकों ने शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई उपयोगी सुझाव साझा किए।

ये दिए सुझाव
-शिक्षण संस्थान आर्थिक संकट से जूझ रहे, इसलिए सरकार वित्तीय सहयोग करें।
-आरटीई के दो साल से बकाया पैसों का भुगतान किया जाए।
-पाठ्यक्रम में प्रकृति से जुड़े अंश शामिल किए जाएं।
-विद्यार्थियों का भौतिक संसाधनों के प्रति सुझाव रोकने के लिए शिक्षण व्यवस्था में परिवर्तन किया जाए।
-ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था को भी मान्यता मिले।

ये बोले संचालक
- नकारात्मक विचारधारा को सकारात्मकता में बदलनी चाहिए। महामारी में हमें चेताया है कि मनुष्य को प्रकृति से प्रेम करते हुए तथा इसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीया जाए। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली वर्तमान समय की भी मांग है, लेकिन स्कूल-कॉलेज का औचित्य हमेशा बना रहेगा। -शीतल राव, विवेक स्कूल, बाली

- ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था प्रचलन में लाई जा रही है। इसने विद्यार्थियों के सामने नया ट्रेंड स्थापित किया है। हम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। इसके परिणाम काफी सकारात्मक है। इस व्यवस्था के कारण भविष्य में कागज की खपत भी कम होने से प्रकृति पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। - राजेंद्र आर्य, रेनबो पब्लिक स्कूल, पाली

- कोरोना महामारी के चलते शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षा पद्धति को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन यह व्यवस्था क्लासरूम व्यवस्था की बराबरी नहीं कर सकती है। सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में बाकी रही परीक्षाओं और पाठ्यक्रमों को जल्द सार्वजनिक करना चाहिए। -शिखा जैन, निदेशक, एमटीआइएस, पाली

- निजी शिक्षा में विद्यालय प्रबंधन भी अभिभावकों के साथ इस विकट समस्या में सहयोग के लिए तैयार है। लेकिन सरकार को भी पहल करते हुए निजी विद्यालयों को आर्थिक संबलता प्रदान करने के लिए विशेष पैकेज जैसी व्यवस्थाओं को करना चाहिए। - केएन भाटी, निदेशक, विद्या भारती सी. सैकंडरी स्कूल, जालोर

- शिक्षा क्षेत्र में छोटे निजी विद्यालयों को आर्थिक पैकेज की महती आवश्यकता है। आरटीई के पिछले दो वर्ष का बकाया भुगतान सरकार को जल्द करना चाहिए। विद्यार्थियों को प्रकृति से जोडऩे के लिए पाठ्यक्रम में प्रकृति से जुड़े अंश समावेद करने चाहिए। -देवेंद्रसिंह राठौड़, निदेशक, आस्था कॉलेज, सिरोही

- कोरोना महामारी के सकारात्मक पहलू को जरूर देखना चाहिए। शिक्षण व्यवस्था को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दिया गया है यह भी समय की जरूरत है। इसके अलावा सरकार को शिक्षण संस्थानों के सुचारु संचालन के लिए उनकी आवश्यकताओं पर गौर करना चाहिए। -सौरभ मिश्रा, निदेशक, आनंद विद्या मंदिर, उच्च माध्यमिक, सिरोही

- शिक्षा क्षेत्र में छोटे निजी विद्यालयों को आर्थिक पैकेज की महती आवश्यकता है। आरटीई के पिछले दो वर्ष के बकाया भुगतान करती है तो कहीं ना कहीं संबल प्रदान होगा। पाठ्यक्रम को लेकर निर्णय पेंडिंग है उसकी घोषणा भी जल्द की जानी चाहिए। - अजय कुमार गुप्ता, जिला सचिव, आदर्श शिक्षण संस्थान, जालोर

- कोरोना के कारण चुनौतियां बढ़ी है, लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं है। वर्तमान ऑनलाइन शिक्षा पद्धति एक अच्छे विकल्प के रूप में उभरी है, लेकिन इसका उपयोग एक निश्चित समय तक किया जा सकता है। वर्तमान में बच्चों को प्रकृति की तरफ मोडऩे का सबसे अनुकूल समय है। - आशुतोष पाटनी, निदेशक, एसपीपीजी कॉलेज, सिरोही

- सभी स्कूल वित्तीय संकट में है। राज्य सरकार के उल्टे-सीधे बयान से परेशानी और बढ़ गई है। सरकार को हमारी परेशानियों को समझकर उनका समाधान करना चाहिए। वर्तमान समय का सदुपयोग करने के लिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, लेकिन कहीं जगह नेटवर्क की समस्या है। - दीपक पाठक, चेयरमैन, रॉयल राजस्थान पब्लिक स्कूल, आबूरोड

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Suresh Hemnani Desk
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