रहस्यमयी आवाजें निकाल कर ग्रामीणों को चोरों से सावचेत करती थी माता आशापुरा

- 300 साल पहले गौरी भाखरी की तलहटी में बसा था बाला गांव
- गौरी भाखरी पर 400 साल पहले विराजमान हुई थी माता आशापुरा
- 300 साल पहले चोर- डाकुओं द्वारा खंडित कर दी गई थी माता की प्रतिमा
- करीब 30 साल पहले माता ने स्वपन में आकर वापस पूजा अर्चना करवाई शुरू

By: Suresh Hemnani

Published: 18 Apr 2021, 07:09 PM IST

पाली। जिले के बाला गांव से 5 किलोमीटर दूर गौरी भाखरी स्थित माता आशापुरा के मंदिर पर श्रद्धालुओं की हरदम भारी भीड़ रहती है। बाला गांव के डूंगरसिंह सोनीगरा कहते हैं कि करीब 400 पहले साल विक्रम संवत 1697 को ठाकुर हरीसिंह ने गौरी भाखरी की तलहटी में बाला गांव बसाया था। पहाड़ी पर चबूतरा बनाकर माता आशापुरा को विराजित कर उनकी पूजा अर्चना शुरू की। गांव व माता की स्थापना के बाद पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण रात को चोर-डाकु ओं व जानवरों का ग्रामीणों में भय बना रहता था। माता रात्रि में रहस्यमयी आवाज निकालकर ग्रामीणों को चोर-डाकु ओं व जानवरों से सावचेत करती थी।

करीब 300 साल पहले जब चोर-डाकू गांव में लूटपाट करने आए तब माता ने रहस्यमयी आवाजें निकालनी शुरू की तो चोरों ने आवाज की तरफ पत्थर फेंकने शुरू कर दिए और माता की प्रतिमा खंडि़त कर दी। जिससे माता द्वारा लगाई जाने वाली रहस्यमयी आवाज भी बंद हो गई। इसके बाद चोर-डाकु ओं का ग्रामीणों में भय बढ़ जाने के कारण ठाकुर ने बाला गांव को वहां से हटाकर 5 किलोमीटर दूर डेंडा व कूरना के बीच मुख्य मार्ग पर नया बाला बसा दिया। इसके बाद यह प्रतिमा करीब 150 साल तक खंडित ही रही। बाद में ठाकुर हबतसिंह ने शेषमल जैन व अन्य ग्रामीणों के सहयोग से खंडित प्रतिमा के पास ही नई प्रतिमा की स्थापना करवाई।

लेकिन, किसी के द्वारा माता की पूजा अर्चना नही किए जाने के कारण माता ने करीब 30 साल पहले बाला गांव निवासी उम्मेद सिंह पुत्र गजेसिंह को स्वपन में आकर कहा कि मेरी पूजा-अर्चना शुरू करो। तब उम्मेदसिंह भगवा धारण कर पूनम पुरी महाराज बन गए एवं मंदिर में माता की पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। मंदिर पुजारी नारायण भारती बताते हैं कि मां की आस्था के चलते यहां पर रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु आने लग गए। आस-पास से कई समाजसेवी जुड़ते गए व उनके चढ़ावे से महंत पूनम पुरी महाराज ने मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया एवं माता के भव्य मंदिर को बनवाकर 2012 में मंदिर व माता की नवीन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। कहा जाता है कि माता के दरबार में जो मन्नत मांगी

Suresh Hemnani
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