कोरोना का दर्द : कड़वाहट के घूंट पी रहे माटी के लाल

-कोरोना का बैर, अपनों अपनों में गैर
-प्रवासियों के प्रति बदला ग्रामीणों का रवैया

By: rajendra denok

Updated: 23 May 2020, 06:17 PM IST

-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। ‘आइना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे, मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे।’ हिन्दी फिल्म का यह गाना इन दिनों प्रवासियों (मारवाडिय़ों) पर सटीक बैठ रहा है। अथक परिश्रम, हूनर और जज्बे से देशभर की अर्थव्यवस्था पर अपनी छाप छोडऩे वाले माटी के लाल कोरोनाकाल [ Corona period ] में अपनों से ही कड़वाहट के घूंट पी रहे हैं।

कोरोना संक्रमण फैलने के बाद बड़ी पाली, जालोर व सिरोही जिलों में बड़ी तादाद में प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। कस्बों और गांवों में कोरोना का भय इतना गहरा उतर गया कि केवल गांव के लोग ही नहीं, परिजन और रिश्तेदार भी उन्हें तिरस्कृत भाव से देख रहे हैं। प्रवासियों के प्रति ग्रामीणों का रवैया पूरी तरह से बदल गया है। उन्हें संक्रमण का बड़ा खतरा इन्हीं से लग रहा है। ऐसे माहौल में प्रवासी खुद को असहज और अपमानित महसूस कर रहे हैं। जबकि भामाशाह और रोजगार उपलब्ध के रूप में प्रवासियों का बड़ा योगदान है।

साढ़े तीन लाख प्रवासी लौटे वतन
पाली, जालोर व सिरोही में करीब चार लाख प्रवासी लॉकडाउन के दौरान आए हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडू समेत विभिन्न राज्यों में नौकरी व व्यवसाय कर रहे प्रवासियों की आवक अभी भी जारी है। प्रतिदिन टे्रन, बस और निजी वाहनों से प्रवासी अपने घरों को लौट रहे हैं। पाली जिले में 1 लाख 50 हजार, सिरोही में 46 हजार तथा जालोर में 1 लाख 82 हजार से अधिक प्रवासी आ चुके हैं। हालांकि, जिला प्रशासन उन्हें होम क्वॉरंटीन कर रहा है।

प्रवासियों पर सितम की बानगी
उदाहरण-1
किसी राज्य में व्यापार कर रहा एक प्रवासी परिवार लॉकडाउन के दौरान गांव आया। बीमार बच्चे के इलाज के कारण वह परिवार गांव की बजाय सादड़ी में मकान किराए पर लेकर रहने लगा। इसी मकान में वह परिवार सहित होम आइसोलेशन में रह रहा था। यहां तक की मकान की चाबी बीएलओ को सौंप दी गई। इसके उपरांत ग्रामीणों ने संक्रमण की अफवाह फैलाकर जिला प्रशासन पर ऐसा दबाव बनाया कि प्रवासी को मकान छोडकऱ जाना पड़ा। उसका गांव सादड़ी से करीब 13 किलोमीटर दूरी पर है।

उदाहरण-2
सादड़ी के करीब पांच किलोमीटर दूरी पर ही एक और गांव है, जहां प्रवासी परिवार के साथ ग्रामीणों ने अछूत-सा व्यवहार किया। ग्रामीणों ने गांव के दुकानदारों को मना कर दिया कि वे प्रवासी को राशन-दूध इत्यादि नहीं देंगे। यहां तक की पानी की आपूर्ति बंद करने के लिए भी ग्रामीणों ने भरसक कोशिश की। ग्रामीणों की इस करतूत से यह परिवार कई दिन तक असहज रहा। आखिरकार, सरकारी कार्मिकों की मदद से उसके घर में राशन-दूध की जरूरत पूरी हुई।

उदाहरण-3
महाराष्ट्र में नौकरी कर रहा सायला के निकट का एक प्रवासी पिछले दिनों किसी तरह भीनमाल पहुंचा। यहां से उसने भाई को ले जाने के लिए बुलाया। भाई ने यह कह कर मना कर दिया कि उसके यहां आने से सभी खतरे में आ जाएंगे। यह सुनकर प्रवासी की आंखों से अश्रुधारा फूट पड़ी। इसी तरह, भीनमाल के पास ही एक गांव में बाहरी राज्य से आए युवक को वाहन में बिठाने से इनकार कर दिया।

अमानवीय व्यवहार उचित नहीं
प्रवासियों के साथ कई जगह अमानवीय व्यवहार किया किया जा रहा है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। दिलों में दूरियां बनाकर कोरोना को भगा नहीं पाएंगे। प्रवासी हमारा गौरव है। संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं। उन्हें अपमानित या परेशान न करें। -श्रवणसिंह राठौड़, अध्यक्ष, प्रवासी फ्रेंड्स फाउंडेशन

घृणा नहीं सहयोग करें
गांवों में प्रवासियों से किए जा रहे बर्ताव से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने देशभर में नाम रोशन किया है। यहां के लोगों को रोजगार दिया है। जब भी जरूरत पड़ी मदद के लिए तैयार रहते हैं। कोरोना के कारण कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं है इसलिए प्रवासी अपने घर आ रहे हैं। हम भी चाहते हैं कोई संक्रमित नहीं हो। घृणा की बजाय मदद करें। -जीवराज राजपुरोहित, प्रवासी प्रकोष्ठ, बेंगलूरु

आंकड़ों की जुबानी
पाली आए डेढ़ लाख प्रवासी
-22108 बाली उपखण्ड में
-17091 देसूरी उपखंड में
-18599 जैतारण उपखंड में
-20641 मारवाड़ जंक्शन में
-13214 पाली उपखंड में
-9440 रायपुर उपखंड में
-15292 रानी उपखंड में
-5140 रोहट उपखंड में
-11646 सोजत उपखंड में
-25546 सुमेरपुर उपखंड में
-158717 कुल प्रवासी
(पाली जिले में 24 मार्च के बाद आए प्रवासियों का आंकड़ा)

rajendra denok Reporting
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