पाली में 45 लाख से अधिक राशि खर्च कर बचाएंगे बच्चे की जान

-बांगड़ चिकित्सालय में एक बच्चा वार्ड और थेलेसिमिया वार्ड बनाने की कवायद
-एसएनसीयू में बढ़ाए जाएंगे बेड

By: Suresh Hemnani

Published: 26 Dec 2020, 08:19 AM IST

पाली। पाली के बांगड़ चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में भले ही तब्दील कर दिया है, लेकिन बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं अभी तक पुरानी ही है। हालात यह है कि चिकित्सालय में जन्म से रक्त नहीं बनने की बीमारी से ग्रसित बच्चों को रक्त चढ़ाने के लिए थेलेसिमिया वार्ड तक नहीं है। ऐसे में उनके सामान्य वार्ड में ही रक्त चढ़ाया जाता है। अब इन हालातों को बदलने की कवायद शुरू हुई है। इसके तहत चिकित्सालय के शिशु रोग विभाग की ओर से तीन प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजे गए हैं। इनमें एक 24 बेड का बच्चा वार्ड बनाने, एक थेलेसिमिया वार्ड बनाने और तीसरा एसएआरसीयू वार्ड में बेड की संख्या बढ़ाने का है। इन तीनों कार्यों पर 45 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।

24 बेड का होगा नया वार्ड
बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में अभी 24 बेड का बच्चा वार्ड है। इसमें कई बार बच्चों की संख्या अधिक होने पर एक से अधिक बच्चों को भर्ती करना पड़ता है। इस कारण अब चिकित्सालय में एक नाया 24 बेड का वार्ड बनाने के लिए 32 लाख रुपए का प्रपोजल भेजा गया है। इस नए वार्ड में ऑक्सीजन लाइन, सेक्शन व एसी आदि की व्यवस्था रहेगी।

रोजाना आते हैं दो से तीन बच्चे
अस्पताल में थेलेसिमिया वार्ड नहीं है। जबकि रोजाना यहां दो से तीन बच्चे रक्त चढ़ाने के लिए आते है। ऐसे में इन बच्चों को सामान्य वार्ड में लिटाकर ही रक्त चढ़ाया जाता है। जबकि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक थेलेसिमिया वार्ड होना चाहिए। अब अस्पताल में 10 बेड का डेडीकेटेड थेलेसिमिया वार्ड बनाने पर 10 लाख रुपए से अधिक की राशि व्यय की जाएगी।

एसएनसीयू के लिए है हॉल
चिकित्सालय में अभी एसएनसीयू वार्ड में केवल बारह बेड है। इस कारण बच्चों को भर्ती रखने में बहुत परेशानी होती है। कई बार एक बेड पर दो-दो नवजात भी रखने पड़ते हैं। इसके लिए अब चिकित्सालय में खाली पड़े एक हॉल में यह वार्ड बनाना तय किया गया है। वहां नए बेड लगने पर करीब 40 बेड हो जाएंगे। इसके लिए ऑक्सीजन पॉइंट भी लगा दिए गए है। हॉल के जीर्णोद्धार का कार्य कराने का प्रस्ताव भेजा गया है।

दो वार्ड की जरूरत
बच्चों के लिए दो वार्ड की जरूरत है। एसएनसीयू भी होना जरूरी है। इस कारण इनके प्रस्ताव बनाकर भेजे हैं। इसकी स्वीकृति बहुत जल्द मिलने की उम्मीद है। -डॉ. आरके बिश्नोई, एचओडी, शिशु रोग विभाग, बांगड़ चिकित्सालय, पाली

बच्चों को मिल सकेगी सुविधा
इस बारे में अधिकारियों ने प्रस्ताव भिजवाने को कहा था। वैसे एचसीआइ के लिए भी दो वार्ड की जरूरत होती है। इस कारण प्रस्ताव भेजे है। एसएनसीयू को लेकर कवायद शुरू कर दी है। -डॉ. हरीश आचार्य, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली

Suresh Hemnani
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