किसानों के लिए नजीर बने देवीसिंह

उद्यान और घोड़ों वाले देवीसिंह के नाम से क्षेत्र में परिचित है यह किसान

By: Om Prakash Tailor

Updated: 29 Mar 2019, 01:55 PM IST

महेश चन्देल धनला।
खेती में कुछ अलग करने की ललक के कारण पाली की उम्मेद मिल्स मेंश्रमिक का कार्य छोडक़र खेतीबाड़ी का व्यवसाय चुनने वाले जाणुन्दा के देवीसिंह राजपुरोहित ने कम जमीन में भी कमरतोड़ मेहनत कर उद्यान को इस प्रकार बनाया कि आज उनके मात्र १.७ हैक्टेयर जमीन पर आम की ११ प्रजातियों के ६५ पौधे और कई प्रकार के दुलर्भ पेड़ पौधे लहरा रहे हैं। खेती के साथ ही पशुपालन के कार्य में नए आयाम स्थापित कर क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं। देवीसिंह की इसी मेहनत का नतीजा है कि आज आस-पास के क्षेत्र में लोग बगीचे और घोड़ों वाले देवीसिंह के नाम से जानते हैं। ६० वर्षीय किसान देवीसिंह पुत्र कुकसिंह राजपुरोहित १३ वर्ष तक पाली की उम्मेद मिल में श्रमिक का कार्य किया तथा १९८६ में जाणुन्दा आकर खेतीबाड़ी का कार्य शुरू किया। विरासत में उन्हें जाणुन्दा के पुराना धनला मार्ग पर नदी किनारे मात्र १.७ हैक्टेयर जमीन का टुकड़ा मिला। जहां तीन बार बोर कराने के बाद भी पानी नहीं मिला लेकिन इस मेहनतकश धरतीपुत्र ने उम्मीद नहीं छोड़ी। चौथी बार बोर करवाया तो मीठा जल निकल पड़ा। इसके सहारे खेतीबाड़ी का कार्य शुरू किया। पंरपरागत फसलों के साथ ही देवीसिंह ने कुछ अलग करने की दिशा में खेत के चारों तरफ आम की विभिन्न किस्मों के पौधे लगाए तथा नियमित देखभाल के साथ कृषि विशेषज्ञों का परामर्श लिया। समय के साथ ये पौधे पेड़ बन गए तथा वर्षो बाद आज उनकी इसी मेहनत के कारण छोटे से भूखण्ड पर स्थित बाग में ग्यारह प्रकार की प्रजातियों के ६५ आम के वृक्ष, नीम्बू की विभिन्न प्रजातियां आसाम, कागजी, ३ बीज, केला, मौसमी, सीताफल, शहतूत, अंजीर, चीकू, केसर, एप्पल, इलायची, जायफल, तेजपत्ता, लौंग, कालीमिर्च, चायपत्ती, बिल्व पत्र, सूरजमुखी, मोगरा सहित कई प्रजातियों के फल-फूलदार पेड़ पौधे उद्यान की शोभा बढ़ा रहे हैं।
आर्गेनिक खाद के लिए शुरू किया पशुपालन
खेतीबाड़ी और उद्यान के साथ ही किसान देवीसिंह ने पशुपालन का व्यवसाय शुरू कर दुग्ध संग्रहण केंद्र पर दूध सप्लाई का कार्य शुरू किया। गाय-भैसों के साथ घोड़े रखना शुरू कर दिया। पशुओं के लिए जमीन के कुछ हिस्से में रजके की खेती शुरू की। पशुओं को खिलाने के लिए चारे व रजके को काटने की कुतरन मशीन लगाई। पशुओं से मिलने वाली गोबर खाद का खेती में उपयोग शुरू किया। आज उनके यहां १२ गाय-भैंस तथा ७ घोडे-घोडिय़ां पल रहे हैं।
अब भी नया अनुभव लेता हूं
किसान देवीसिंह ने बताया कि खेती में हमेशा कुछ नया करने की सोचता हूं। मेरे पास पर्याप्त जमीन नहीं है लेकिन जो है उसमें कुछ अलग किया है। पौधे मैं स्वयं तैयार कर परिष्कृत करता हूं। इसके लिए समय -समय पर कृषि विशेषज्ञों का परामर्शलता लेता हूं। खेती के साथ ही पशुपालन का व्यवसाय भी है। इसीको परिवार की जीविका बनाया हुआ है। परिवार के सभी लोग मिलजुल कार्य करते हैं। मैं जिला व तहसील स्तरीय कृषि मेलों व प्रदर्शनी में भी जाता हूं ताकि कुछ नया अनुभव मिले। खेती के क्षेत्र में कईं प्रशस्ती पत्र भी मिले हैं। आस-पास के किसानों क ो भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करता हूं।

 

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