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अनूठी परम्परा : भेड़ों और बकरियों के लव लेने की प्रक्रिया के दौरान होती है सामाजिक सभा

- देवासी समाज की दक्षता को संरक्षण और संवद्र्धन की आवश्यकता

जालोर

Updated: February 26, 2022 08:38:38 pm

-रणजीतसिंह राठौंड़
जालोर/भाद्राजून। पश्चिमी राजस्थान के सुदूर भाग में आज भी गांवों में देवासी कौम में एकता और भाईचारा की मिसाल देखने को मिलती है। देवासी समाज जब अपने भेड़ बकरियों की ऊन कतरते हैं तो उसे लव लेना कहा जाता हैं। जिसमें अपने मोहल्ले के भाई-बंधु इस कार्य में सहयोग करते हैं। लव लेने की प्रक्रिया शुरुआती गर्मियों के दिनों होती है। इस कार्य को ये लोग बड़ी दक्षता से करते हैं।
अनूठी परम्परा : भेड़ों और बकरियों के लव लेने की प्रक्रिया के दौरान होती है सामाजिक सभा
अनूठी परम्परा : भेड़ों और बकरियों के लव लेने की प्रक्रिया के दौरान होती है सामाजिक सभा
देवासी समाज के लोग अपने हाथ के हुनर से बड़ी सफाई से इस कार्य को करते हैं। यह प्रक्रिया देवासी समाज में परम्परागत रूप से चली आ रही हैं। साथ ही भेड़-बकरियों की ऊन कतरना स्वयं ही करते हैं। ये पशुपालक आज भी इस हुनर और परम्परा को संजोए हुए है।
जट से बनाते है भाखल
बकरियों के काटे जाने वाले बाल को जट कहा जाता है, जिससे भाखला का निर्माण होता है। यह भाखल घरों में दरियो और कालीनों का काम करता है। राजस्थान की भाखला देश-विदेश में भी प्रसिद्ध हैं।
अविका योजना के सहयोग की अपील
राजस्थान के भेड़-पालकों के लिए सरकार की ओर से अविका योजना का संचालन किया जा रहा है। जिसमें भेड़ पालकों को आर्थिक सहयोग दिया जाता है। लेकिन जानकारी के अभाव में इन भेड़ पालकों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
लव लेने पर होती है सभा
जिस पशुपालक के घर लव की प्रक्रिया होती है उस दिन उनके घर में सभा आयोजित की जाती है। सभा में देवासी समाज के अलावा मोहल्ले के लोग शामिल होते है। इस दौरान सभी मिलकर समाजिक चर्चा करते है।
ऊन और खाद की रहती है डिमांड
लव कतरन से प्राप्त ऊन को ऊन मंडी में बिचौलियों द्वारा बेचा जाता है। जिससे इन भेड़ पालकों को निर्धारित लागत से कम मूल्य मिलता है। जबकि इस क्षेत्र की ऊन की काफी डिमांड रहती है और ये काफी अच्छी भी मानी जाती है। पशुपालकों के आर्थिक स्त्रोत में ऊन का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। हालांकि बकरियों और भेड़ों से मिलने वाली खाद को जोधपुर के तिंवरी-मथानिया में काफी मात्रा में बेची जाती है। इस खाद को मिर्ची उत्पादन के लिए काफी अच्छा माना जाता है।
जागरुकता का अभाव...
पशुपालक वर्ग का यह तबका अभी भी सरकारी योजनाओं से वंचित है। क्योंकि इनको पशु बीमा योजना के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी नहीं है। इस कारण कई बार भेड़ बकरियां मरने के कारण इन्हें आर्थिक रूप से हानि उठानी पड़ती है। इसलिए सरकार को इस तबके को जागरूक करने के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना जरूरी हैं।
लव में प्रयुक्त होने वाले औजार
पशुपालक जिस औजार से ऊन कतरता है उसे स्थानीय भाषा में कतिया कहा जाता है जो लोहे का धारदार कैंचीनुमा बड़ा औजार होता हैं। इसे कतरन के दौरान बार-बार पानी में डुबोकर उपयोग में लिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना
ग्रामीण तेजाराम देवासी, चौथाराम देवासी, भरत कुमार ने बताया की देवासी समाज में युवाओं का पशुपालन के प्रति लगाव थोड़ा कम होता जा रहा है, क्योंकि पशुपालन से इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही है। जिससे युवा वर्ग नए रोजगार के अवसर ढूंढ रहे हैं।

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