कपड़ा इकाइयों से सेसकर वसूलने की 28 साल पुरानी व्यवस्था समाप्त

कपड़ा इकाइयों से सेसकर वसूलने की 28 साल पुरानी व्यवस्था समाप्त

Suresh Hemnani | Updated: 09 Aug 2018, 01:30:23 PM (IST) Pali, Rajasthan, India

-अब सीइटीपी फैक्ट्रियों से वसूलेगी प्रति केएलडी चार्ज
-प्रति माह 1 करोड़ 40 लाख रुपए वसूला जाता था सेसकर
-अब 2 करोड़ 80 लाख रुपए की होगी आय

पाली। नगर परिषद, जिला कलक्टर एवं सीइटीपी के प्रस्ताव पर मोहर लगाते हुए
स्वायत्त शासन विभाग ने सेसकर (ग्रे कपड़े पर प्रदूषण जन्य व्यवसाय कर)
की 28 साल पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब सीइटीपी प्रति केएलडी
वाटर ट्रीटमेंट चार्ज वसूल करेगा। इस फैसले से सीइटीपी की आर्थिक स्थिति
सुदृढ़ होगी और सीइटीपी के संचालन में आसानी रहेगी। स्वायत्त शासन विभाग
के निदेशक एवं संयुक्त सचिव पवन अरोड़ा ने बुधवार को एक आदेश जारी कर
सेसकर को समाप्त कर दिया। नगर परिषद एवं जिला कलक्टर ने 7 मई तथा सीइटीपी
ने 2 मई को सेसकर समाप्त करने का प्रस्ताव भेजा था। नगर परिषद की 18 मई
को हुई साधारण सभा की बैठक में भी सेसकर समाप्त का प्रस्ताव लिया था।
सरकार को भेजे प्रस्ताव में बताया गया था कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल
की ओर से संयुक्त जल परिशोधन संयंत्रों का संचालन एसपीवी के माध्यम से
किया जा रहा है। पाली में सीइटीपी की स्थापना की जा चुकी है तथा एसपीवी
के माध्यम से ही ट्रीटमेंट प्लांटों का रखरखाव किया जा रहा है। ऐसे में
सेसकर समाप्त किया जाना उपयुक्त रहेगा।


दुगुनी होगी आय, चोरियां भी थमेगी
सेसकर से प्रति माह एक करोड़ 40-50 लाख रुपए की आय होती थी। अब करीब दो
करोड़ 80 लाख रुपए की आय होने की संभावना है। सीइटीपी को आर्थिक रूप से
बड़ा फायदा होगा। इसके अलावा सेसकर की चोरियां भी बड़ी मात्रा हो रही थी।
यह व्यवस्था बंद होने से चोरियों पर भी लगाम लगेगा। नगर परिषद भी 10
फीसदी खर्च वसूलती थी।


प्रति केएलडी 2100 रुपए वसूलेगा ट्रस्ट
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक इकाई को डिस्चार्ज होने वाले पानी पर
ट्रीटमेंट चार्ज देना होगा। सीइटीपी ने इसके लिए नया पैमाना बनाया है।
जिसके तहत प्रति केएलडी 2100 रुपए प्रतिमाह लिए जाएंगे। यानि किसी इकाई
का डिस्चार्ज 25 केएलडी है। इस आधार पर उसे 52 हजार 500 रुपए प्रतिमाह
ट्रीटमेंट चार्ज के रूप में ट्रस्ट को चुकाने होंगे।


मजबूत होगा ट्रस्ट
सेसकर बंद होने से सीइटीपी मजबूत होगा। आर्थिक सुदृढ़ता से प्लांटों का
रखरखाव बेहतर ढंग से कर सकेंगे। ट्रस्ट को आय भी दुगुनी होगी। कपड़ा
उद्योग के लिए यह फैसला हितकर है। -अनिल मेहता, अध्यक्ष, सीइटीपी

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