उलझे मरीज व चिकित्सक, मरीजों का आरोप- जबरन अस्पताल से छुट्टी का दबाव, गिनती के रेमडेसिवर

- पाली बांगड़ अस्पताल में कतार
- ऑक्सीजन बैड फुल, नए मरीजों को भर्ती करना मुश्किल
- थोड़े ठीक मरीजों को डिस्चार्ज करने पर उलझे मरीज व चिकित्सक

By: Suresh Hemnani

Published: 23 Apr 2021, 08:24 AM IST

पाली। बांगड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन पर भर्ती मरीजों के परिजन ने आरोप लगाया है कि यहां ऑक्सीजन बैड पर भर्ती मरीजों को चिकित्सक जबरन छुट्टी देने का दबाव बना रहे हैं, जबकि मरीज की स्थिति ठीक नहीं है। इस बात को लेकर अस्पताल में गुरुवार को चिकित्सकों व मरीजों में परिजनों में उलझने की घटनाएं भी हुई। इधर, कोरोना रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के सबसे बड़े बांगड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन बैड खाली नहीं है। जबकि नए मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं, उन्हें भर्ती करना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल में मरीजों की कतार लगी हुई है। यहां तक कोरोना जांच के लिए भी लम्बी कतार देखी जा रही है।

अस्पताल प्रशासन का दावा-सेचुरेशन 94, स्थिति ठीक, ऐसे में भर्ती का ओचित्य नहीं
अस्पताल में बैड की मारामारी है। अस्पताल प्रशासन चाह रहा है कि कम गंभीर मरीजों को उपचार देकर छुट्टी दे दी जाए, तकि उनकी जगह गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा सके। लेकिन मरीज भी अस्पताल से ऐसे हालात में छुट्टी लेना नहीं चाह रहे हैं। गुरुवार को तीन चार मरीज, जो ऑक्सीजन पर थे और चिकित्सक उन्हें छुट्टी देना चाह रहे थे, लेकिन मरीजों व उनके परिजनों ने गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए छुट्टी लेने से मना कर दिया। इनमें से ऐसे मरीज थे, जिनकी सेचुरेशन 93-94 थी, हालांकि वे ऑक्सीजन पर थे, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें घर पर ही ऑक्सीजन लगाने की सलाह दी। इस बात को लेकर मरीज, परिजनों व चिकित्सकों में बहस भी हुई।

मरीज मांग रहे रेमडेसिवर इंजेक्शन
कोरोना के लिए काम में आने वाले रेमडेसिवर इंजेक्शन की मारामारी अभी जारी है। जोधपुर से गिनती के इंजेक्शन मिल रहे हैं, इधर, ऑक्सीजन पर भर्ती हर मरीज ये इंजेक्शन की मांग कर रहा है। गुरुवार रात को कुछ इंजेक्शन मिले, इनमें से डे केयर के लिए इएसआई अस्पताल भी भेजे गए, बाकी रहे इंजेक्शन अति गंभीर मरीजों को लगाया जाएगा।

कालाबाजरी न हो, टीम गठित
रेमडेसिवर इंजेक्शन की कालाबाजरी न हो, इसके लिए जिला कलक्टर व सीएमएचओ की देखरेख में टीम का गठन किया गया है। चिकित्सक की निगरानी में ये इंजेक्शन लगवाए जा रहे हैं। हालांकि इस इंजेक्शन की सप्लाई जरूरत की लिहाज से कम है।

जबरन छुट्टी नहीं दे रहे
मरीजों को जबरन अस्पताल से छुट्टी नहीं दे रहे हैं, जिनकी स्थिति ठीक है, उन्हें छुट्टी दी जा रही है, ताकि बैड खाली हो और गंभीर मरीजों को उपचार मिल सके, मरीज पेनिक न हो, वे पेनिक होकर अस्पताल से जाना नहीं चाह रहे हैं। रेमडेसिवर इंजेक्शन की मॉनिटरिंग की जा रही है। चिकित्सक के कहने पर ही मरीजों को लगाया जा रहा है। - डॉ. आर.के. विश्नोई, कार्यवाहक, पीएमओ, बांगड़ अस्पताल, पाली

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