छह गांवों के मरीज एक कम्पाउण्डर के भरोसे

छह गांवों के मरीज एक कम्पाउण्डर के भरोसे
छह गांवों के मरीज एक कम्पाउण्डर के भरोसे

Rajeev Dave | Updated: 13 Oct 2019, 07:40:00 AM (IST) Pali, Pali, Rajasthan, India

- ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है

निमाज. एक ओर सरकार गांवों में चिकित्सा सुविधा दुरुस्त करने की बात कह रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सरकारी चिकित्सालयों में चिकित्सकों, चिकित्साकर्मियों व चिकित्सीय उपकरणों के अभाव में ठोकरे खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांवों के सरकारी चिकित्सालयों में रिक्त पदों के कारण मरीजों को चिकित्सीय सुविधा का लाभ नहीं मिल रही है। मरीजों को चिकित्सकों के अभाव में चिकित्सीय सुविधा सपना बनी हुई है। ऐसे में विशेषकर महिलाओं के लिए प्रसव व अन्य बीमारियों के इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसे ही कुछ हाल मोहराई ग्राम पंचायत मुख्यालय पर स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का है। मोहराई का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र एक नर्स ग्रेड द्वितीय के भरोसे चल रहा है। यहां के मरीजों को इलाज के लिए ब्यावर, जैतारण या बड़े-बड़े चिकित्सालय जाना मजबूरी बन जाती है।

एक को छोड़ सभी पद रिक्त

मोहराई के स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्साधिकारी, नर्स ग्रेड द्वितीय के दो, महिला स्वास्थ्य दर्शिका, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, लैब टेक्नीशियन, सूचना सहायक, सफ ाई कर्मचारी व वार्ड बॉय के पद स्वीकृत हैं। इनमें से एकमात्र नर्स ग्रेड द्वितीय के अलावा सभी पद रिक्त हैं। ऐसे में सफ ाई से लेकर इलाज तक सभी कार्य उसी को करने पड़ते हैं। यहां एक माह में करीब छह सौ मरीजों का आउटडोर रहता है। सितम्बर माह में अस्पताल में आउटडोर में 683 व इण्डोर में 20 मरीज आए।

मरीजों को नहीं मिलता समय पर इलाज
मोहराई के स्वास्थ्य केन्द्र पर मोहराई के साथ बिरामपुरी, समोखी, दागला, टूंकड़ा, निम्बेहड़ा क्षेत्र के सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन चिकित्सक एव कार्मिकों के रिक्त पदों के चलते उनको समय पर इलाज नसीब नहीं होता है। ऐसे में उनको इलाज के लिए मजबूरीवश निजी चिकित्सालयों व झोला छाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता हैं। ऐसे में कई बार उनकी जान पर भी बन आती हैं।

महिला मरीज होती हैं परेशान

मोहराई सरपंच रेखा गोस्वामी का कहना है कि मोहराई के स्वास्थ्य केंद्र पर आस-पास के गांव-ढाणियों के मरीज भी आते हैं। चिकित्सक के पद रिक्त होने से उनको परेशान होना पड़ता है। विशेषकर महिला मरीजों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है।

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