मंदिरों में नहीं गूंजा जयकारा, घरों में की मां की आराधना

-भारतीय नवसंवत्सर का आज हुआ आगाज
-कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए घरों में रहे लोग

Suresh Hemnani

25 Mar 2020, 03:38 PM IST

पाली। भारतीय नवसंवत्सर का आगाज बुधवार से हो गया, लेकिन इस बार सडक़ों पर ना तो कोई स्वागत करने वाला मिला और ना ही मंदिरों में जयकारा गूंजे। यह सब कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किया गया। इसमें माता के आराधकों के साथ ही विभिन्न समाजों के लोग भी शामिल है। जिन्होंने निर्णय किया कि कोरोना को हराकर भारत को जिताने के लिए इस बार मां अम्बे के चरणों में घर में रहकर की पुष्प अर्पित करेंगे। माता के चरणों में शीश नवाकर आराधना करेंगे। इधर, नववर्ष के दिन शहर के हर चौराहे को सजाने और वहां आने वालों का गुड़ खिलाकर शुभकामना देने का क्रम टूट गया, लेकिन लोग घर में परिजनों को ही गुड़ खिलाकर व उनके भाल पर तिलक लगाकर नए साल में कोरोना को हराने के लिए ओर अधिक दृढ़ संकल्पित रहे।

सिंधी समाज ने घरों में की झूलेलाल की पूजा
झूलेलाल मण्डल सिंधी कॉलोनी की ओर से हर साल चेटीचण्ड पर जुलूस निकाला जाता है। सिंधी कॉलोनी में मेले सा माहौल रहता है, लेकिन कोरोना को हराने के लिए इस बार ऐसा कुछ नहीं किया गया। अध्यक्ष गुलाबराय मुलचंदानी ने बताया कि इस बार लोगों ने घरों में ही भगवान झूलेलाल का पूजन किया। चावल की देग बनाकर पूजन करने के बाद तालाब में विसर्जित किया। वहीं शहर के सिंधी कॉलोनी, रेलवे स्टेशन, पुराना हाउसिंग बोर्ड व पीएण्डटी कॉलोनी स्थित झूलेलाल मंदिरों में सुबह 9.30 बजे समाज के पांच लोगों ने पहुंच ध्वजारोहण कर आरती की।

घरों में किया पूजन व हवन
गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज की ओर से चैत्र प्रतिपदा पर इस बार सामूहिक समारोह या सम्मान समारोह स्थगित कर दिए गए है। गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज रजत नगर के कोषाध्यक्ष परमेश्वर जोशी ने बताया कि बुधवार को समाज के लोगों ने घरों में ही महर्षि गौतम का विधि-विधान से परिजनों के साथ पूजन किया। इस दौरान घर में ही मां अम्बे की आराधना व पूजन हुआ। जोशी ने बताया कि हमने जो तीन दिन का कार्यक्रम तय किया था। वह कोरोना को हराने के लिए स्थगित किया है।

मंदिरों के पट रहे बंद
शहर के मंदिरों में पूजन व प्रसाद चढ़ाने पर पहले से ही पाबंदी लगा दी गई थी। बुधवार को शहर के साथ जिले के पुनागर माता, मानपुरा भाखरी, सिंधी कॉलोनी देवी मंदिर, पानी दरवाजा जोगमाया मंदिर, हिंगलाज माता मंदिर, सोमनाथ में विराजी अम्बे माता के साथ अन्य मंदिरों में भी केवल पुजारी माता ने ही पूजन किया।

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Suresh Hemnani Desk
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