scriptPet farming after 12 years in Jawai Dam | जवाई रीता तो एक तरफ आया महासंकट, दूसरी तरफ खुले कमाई के द्वार | Patrika News

जवाई रीता तो एक तरफ आया महासंकट, दूसरी तरफ खुले कमाई के द्वार

-जवाई बांध में करीब 12 साल बाद पेट काश्त खेती
-खरबूजे, गेहूं और ककड़ी की पैदावार

पाली

Published: April 30, 2022 09:03:37 pm

-चैनराज भाटी/राजीव दवे
पाली। जवाई रीता तो एक तरफ आया महासंकट, दूसरी तरफ खुले खुशी के द्वार...शीर्षक पढ़कर कोई भी हैरान हो सकता है, लेकिन यह एकदम सत्य है। पश्चिमी राजस्थान के मरुसागर में पानी कम होते ही हर तरह संकट के बादल मंडराने लगे। महासंकट आ भी गया। पानी के लिए जिले में त्राहित्राहि मची है। बांध के कमाण्ड क्षेत्र में खेत सूखे है। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी है, जिनके लिए जल रीतने से कमाई का द्वार खुल गया है। जवाई बांध बनने के बाद एक बड़े भूभाग पर पानी का साम्राज्य स्थापित हो गया। खेती की भूमि भी इसमें जलमग्न हो गई। इस बार करीब बारह साल के बाद जवाई बांध में पानी रीता तो बांध में पेटा काश्त खेती की गई। बांध की नम भूमि व थोड़ी खुदाई के बाद निकलने वाले पानी से बांध में फसल लहलहा रही है। कई लोग तो पेटा काश्त में एक फसल काट भी चुके हैं और अब दूसरी फसल लेने के लिए बुवाई की है।
जवाई रीता तो एक तरफ आया महासंकट, दूसरी तरफ खुले कमाई के द्वार
जवाई रीता तो एक तरफ आया महासंकट, दूसरी तरफ खुले कमाई के द्वार
मैं तो आज तक कोनी आई अठै
जवाई बांध में खेती कर रही गीता का कहना था कि मैं तो ब्याह रे बाद आज तक अठै कोनी आई। ब्याह ने ही 12 बरस बीत गिया है...हमके बांध में पानी कोनी जदै अठै धणी हाथे फसल बोई थी... हमै फसल लेवा ने रोज आवा हो...। उनके पास ही काम कर रही सुगना बोली जवाई में पानी खत्म वै गिया, इणसूं घणी दिक्कत आ रही है। पण इण बार अठै फसल वी, जणूं घर रो खर्चो तो परो चाली।
बांध में ही बनाया कुआं
जवाई बांध में पेटा काश्त के तहत खेती डेड स्टोरेज में उपलब्ध पानी से कुछ दूरी पर की जा रही है। वहां जमीन में दरारे आ चुकी है। जिस पर किसानों द्वारा हल चलाकर बुवाई की गई है। फसल की सिंचाई के लिए किसानों ने बांध परिसर में पांचसात फीट के कुएं खोद दिए है। जिनसे पाइप लगाकर मोटरों से पानी निकाला जा रहा है और खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे कुछ उमीद जगी है।
आनेजाने को बनाए कच्चे रास्ते
जवाई बांध के पेटा काश्त में आनेजाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। किसानों ने खेतों तक पहुंचने और फसल को लाने के लिए दुदनी गांव से होकर कच्चे रास्ते तैयार किए है। इन रास्तों से दुपहिया वाहनों के साथ ट्रैक्टर को भी आसानी से खेत तक ले जा स कता है। वैसे अधिकांश किसान जवाई बांध में आनेजाने व फसल निकालने के लिए दुपहिया वाहनों का उपयोग अधिक कर रहे है।
इन फसलों की बुवाई
जवाई बांध के पेटा काश्त में किसानों ने पहले गेहूं की फसल बोई थी। वह निकालने के बाद अब ककड़ी, टिंडसी की सब्जी उगा रखी है। जिन किसानों ने एक फसल की कटाई कर ली है। वे अब खरबूजों की खेती कर रहे है। जो दस से बारह दिन में तैयार हो जाएंगे। ऐसा होने पर पालीवासी एक बार फिर हेमावास बांध के पाली की शक्कर कहे जाने वाले खरबूजों की जगह जवाई के खरबूजों का स्वाद चख सकेंगे।

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