VIDEO : ‘रामजी’ का पर्यावरण प्रेम : जाते-जाते सौंप गए थे विरासत, अब वृद्ध ‘उत्तराधिकारी’ निभा रहे जिम्मेदारी

Suresh Hemnani | Updated: 02 Aug 2019, 10:34:59 AM (IST) Pali, Pali, Rajasthan, India

- 80 वर्षीय देवासी ने लगाए थे गांव की नाडी पर 150 पौधे- डेढ़ साल से रामलाल मेघवाल निभा रहे जिम्मेदारी

Environment protection :

-दिनेश राजपुरोहित

पाली/गुंदोज। अक्सर ये तो हम सुनते आए हैं कि जिंदगी के अंतिम क्षणों में व्यक्ति को अपनी मेहनत से कमाई पूंजी के अपनों को विरासत के रूप में सौंपने की चिंता होती है। लेकिन, ऐसे शख्स बिरले ही होते हैं जो विरासत के रूप में हरे-भरे लहलहाते पेड़ छोड़ जाते हैं। ... और उससे भी महान व्यक्ति वह है जो जीवन के 70 बसंत देखने के बाद भी इस विरासत को संभालने की जिम्मेदारी उठा लेता है। हम बात कर रहे हैं गुंदोज कस्बे के ऐसे ही दो शख्स की, जिनके नाम भी एक समान है, रामलाल।

पर्यावरण संरक्षण [ environment protection ] को लेकर गांव के अस्सी वर्षीय रामलाल देवासी ने जो हरियाली फैलाने का बीड़ा उठाया वह आज भी गांव का एक 72 वर्षीय व्यक्ति निभा रहा है। प्रतिदिन इन वृक्षों की देखभाल के साथ उन्होंने भी गांव में दस पौधे लगाए हैं। जो आज पेड़ का रूप ले चुके हैं।

दरअसल, गांव के अस्सी वर्षीय रामलाल देवासी भेड़पालक थे, जो अक्सर अपनी भेड़ों को लेकर गांव की सांवलिया नाडी पहुंच जाते थे। सालों पहले उन्होंने इस नाडी को हरा-भरा करने का बीड़ा उठाया और इसके चारों ओर करीब 150 पौधे रोप दिए। खास बात है कि इस शख्स ने अपनी जिम्मेदारी यही खत्म नहीं की। वे प्रतिदिन इन पौधों को पानी पिलाने के साथ ही देखभाल करते थे। धीरे-धीरे पौधे भी बड़े होते गए। इधर, रामलाल भी वृद्ध हो गए। वृद्धावस्था में पहुंचने के बाद भी उनकी इन पेड़ों से मित्रता कम नहीं हुई। वे नियमित रूप से वहां पहुंच जाते। इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई तो उन्हें अपने 150 पेड़ों की चिंता सताने लगी।

किसी ने नहीं भरी हामी तो रामलाल मेघवाल ने संभाली विरासत
ग्रामीणों की मानें तो रामलाल देवासी अक्सर ग्रामीणों के सामने इसको लेकर चिंता भी व्यक्त करते थे। वे गांव की चौपाल पर भी इसको लेकर चिंता जाहिर कर चुके थे कि मेरे पीछे इन पेड़ों की देखभाल कौन करेगा। कई लोगों के पास गए, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं उठाई, सिवााय गांव के ही रामलाल मेघवाल के। जो खुद करीब 72 साल के है। जिम्मेदारी सौंपते ही डेढ़ साल पूर्व रामलाल देवासी की मृत्यु हो गई। ऐसे में गांव के ही 72 वर्षीय रामलाल मेघवाल ने ये जिम्मेदारी ली। करीब डेढ़ साल पहले ली ये जिम्मेदारी आज भी गांव में फलीभूत हो रही है। नाडी के चारों ओर लगे ये पौधे आज वृक्ष का रूप ले चुके हैं। मेघवाल ने भी इन्ही स्थानों पर दस और पौधे लगाए हैं। ये विरासत की जिम्मेदारी का ही असर है कि मौसम चाहे जैसा भी हो रामलाल मेघवाल आज भी पौधों की देखभाल करते हैं। प्रतिदिन उनको पानी पिलाते हैं। जानवरों से भी पौधों की सुरक्षा करते हैं।

जिंदा रहूंगा, तब तक करता रहूंगा सेवा
रामलाल ने मुझे वृक्षों की सेवा करने का जिम्मा दिया है। मैं जिंदा हूं जब तक इन वृक्षों को सेवा करता रहूंगा। पौधों की सेवा करने में मुझे आनंद महसूस होता है। -रामलाल मेघवाल, ग्रामीण

सेवा का यह कार्य अनुकरणीय
मैं प्रतिदिन रामलाल को देखता हूं। वे एक-एक वृक्ष को यह संभालते हैं। ये अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणादायक है। -मदन प्रजापत, ग्रामीण, भेड़ पालक

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