पुलिस व न्यायालय की संख्ती : यहां एक साल में पोक्सो के दर्ज हुए 200 मामले, कोर्ट में रोजाना हो रही सुनवाई

- पुलिस - ऐसे मामलों की दो माह के भीतर कर रही चालान
- न्यायालय- पिछले एक साल में आधा दर्जन से अधिक पोक्सो के अभियुक्तों को सजा [ Poxo convicts punished ]

By: Suresh Hemnani

Published: 03 Dec 2019, 01:47 PM IST

पाली। टोंक में मासूम बच्ची से बलात्कार मामले [ Rape case ] के बाद पुलिस और ज्यादा सतर्क हो रही है। पाली में न्यायालय व पुलिस [ Court and police ] लगातार पोक्सो के मामलों [ Poxo case ] को लेकर सख्त नजर आ रही है। पाली में तीन पोक्सो कोर्ट [ Poxo court ] में रोजाना ऐसे मामलों की सुनवाई की जा रही है। पिछले एक साल में आधा दर्जन से अधिक अभियुक्तों को सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं पाली जिले में करीब 200 मामले पोक्सो के पिछले एक साल में दर्ज हुए। पुलिस ने ऐसे अधिकांश मामलों के दो माह की भीतर चालान पेश किए। बावजूद इसके पोक्सो के मामले कम नहीं हो रहे हैं।

पाली पुलिस ने सात दिन में भी पेश किए चालान
पोक्सो पर पाली पुलिस सख्त है। गत दिनों देसूरी थाने के एक मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर सात दिन के भीतर न्यायालय में चालान पेश किया। ऐसे मामले उदाहरण बन रहे हैं। साथ ही सभी थानाधिकारियों को पोक्सो के मामलों में दो माह के भीतर चालान पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

न्यायालय का डंडा, रोज सुनवाई
पाली में तीन पोक्सो कोर्ट खोले गए हैं। इनमें रोजाना ऐसे मामलों की सुनवाई हो रही है। पिछले एक साल में आधा दर्जन से अधिक दरिंदों को सजा सुनाई जा चुकी है। इन मामलों के निस्तारण में न्यायाधीश लगातार सख्ती बनाए हुए है। ताकि बेटियों से दरिंदगी करने वाले सलाखों के पीछे रहे।

खतरनाक तस्वीर, जेल में 80 प्रतिशत बंदी पोक्सो के
इधर, पोक्सो को लेकर पाली की खतरनाक तस्वीर भी सामने आ रही है। पाली जेल में अस्सी प्रतिशत बंदी पोक्सो के है। जेल डिप्टी इकबाल भाटी की माने तो वर्तमान में पाली उप कारागृह में 110 बंदी बंद है। इनमें से अस्सी प्रतिशत बंदी पोक्सो के है। इन बंदियों को संभालना जेल प्रशासन के लिए मुश्किल हो रहा है।

क्या है पोक्सो कानून
सरकार ने वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया था, जो बच्चों को छेडख़ानी, दुष्कर्म व कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है। पोक्सो शब्द अंग्रेजी से आता है। इसका पूर्णकालिक मतलब होता है ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्डेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीडऩ से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012। इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है।

पुलिस सतर्क, सख्ती बरत रहे
पोक्सो के मामलों को लेकर पुलिस सतर्क है। ऐसे मामलों को दो माह के भीतर चालान किया जा रहा है। पुलिस गंभीर है। टोंक प्रकरण के बाद सभी को और सतर्क रहने के लिए निर्देशित किया गया है। - आनंद शर्मा, एसपी, पाली।

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