सत्ता संग्राम : जालोर-सिरोही में भूचाल बेअसर, पाली में इस्तीफों की सियासत

बड़ा सवाल : न तो बड़ी उम्मीदें और न ज्यादा संभावनाएं

By: rajendra denok

Updated: 15 Jul 2020, 11:44 AM IST

पाली। प्रदेश में कई दिन से चल रहे सियासी घटनाक्रम से मारवाड़-गोडवाड़ [ Marwar-Godwad ] में कोई बड़ा बदलाव होता नहीं दिख रहा है। पाली, जालोर व सिरोही जिले की 14 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का एकमात्र विधायक है। मुख्यमंत्री का गृह संभाग होने के कारण तीनों जिलों में अशोक गहलोत [ cm Ashok Gehlot ] के फॉलोअर नेताओं की तादाद भी ज्यादा है। हालांकि, यहां सचिन पायलट [ Sachin Pilot ] खेमा भी पूरी तरह से सक्रिय है, लेकिन मौजूदा हालात में गहलोत गुट का दबदबा कायम है। पायलट को हटाने के बाद उनके समर्थकों का राजनीतिक भविष्य जरूर सियासी भेंट चढ़ गया है। पाली में जिलाध्यक्ष समेत पायलट के समर्थकों ने त्याग पत्र दिए हैं।

सत्ता : पाली से कोई उम्मीद नहीं, सिरोही में संभावनाएं
प्रदेश में बदले सियासी घटनाक्रम के बाद मारवाड़-गोडवाड़ की सत्ता में भागीदारी को लेकर कोई खास बदलाव नहीं होता दिख रहा। क्योंकि, तीनों जिलों में कांग्रेस का एक ही विधायक है। सांचौर से कांग्रेस के विधायक सुखराम विश्नोई गहलोत सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री है। पाली जिले में कांग्रेस पूरी तरह से खालसा है। यहां एक भी विधायक कांग्रेस का नहीं है। पाली में एक मात्र उम्मीद कांग्रेस समर्थित (अब नहीं) निर्दलीय विधायक खुशवीरसिंह जोजावर से थी। राज्यसभा चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त करने वालों में विधायक का नाम आने के बाद अब यहां भी फिलहाल कोई संभावनाएं नहीं दिख रही। सिरोही में संयम लोढ़ा निर्दलीय विधायक है, लेकिन गहलोत का बराबर साथ दे रहे हैं। ऐसे में सिरोही जिले में कांग्रेस की पतवार लोढ़ा के भरोसे ही है। लोढ़ा के मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावनाएं बन सकती है।

संगठन : पाली में होंगे नए अध्यक्ष, जालोर-सिरोही में भी बदलाव संभव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बदलाव से पाली, जालोर व सिरोही में संगठनात्मक रूप से जरूर बदलाव होगा। पाली में पायलट खेमे के जिलाध्यक्ष चुन्नीलाल चाड़वास के त्याग पत्र देने से नया अध्यक्ष बनना तय है। यहां पायलट की प्रदेश टीम के भी कई पदाधिकारी है। उनका भी बदलाव होगा और नए लोगों को मौका मिलेगा। इसी तरह, जालोर व सिरोही में भी पायलट से जुड़े संगठन पदाधिकारियों पर गाज गिरेगी। इससे पायलट समर्थकों में निराशा का माहौल है। खासतौर से पायलट को भविष्य को नेता मानकर विकल्प के रूप में देख रहे युवाओं के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई है। अब दोबारा गहलोत कैंप से जुडऩे की उनकी मजबूरी हो गई है।

पाली में पायलट समर्थकों ने दिए इस्तीफे
पाली जिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष चुन्नीलाल चाड़वास, प्रदेश सचिव सोमेन्द्र गुर्जर व राजेश कुमावत, पाली विधानसभा युवक कांग्रेस अध्यक्ष चन्द्रकांत मारू ने अपने पदों से त्याग पत्र दे दिया है। प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे को भेजे त्याग पत्र में उन्होंने पायलट को पद से हटाने और उनके साथ अन्याय करने से आहत होकर इस्तीफा देना बताया है।

पाली
कांग्रेस-0
भाजपा-5
निर्दलीय-1

सिरोही
कांग्रेस-0
भाजपा-2
निर्दलीय-1

जालोर
कांग्रेस-1
भाजपा-4

कब-कब रही सत्ता में भागीदारी
2003-2008
वसुंधराराजे सरकार : (भाजपा)
पाली : सुरेन्द्र गोयल, लक्ष्मीनारायण दवे
सिरोही : ओटाराम देवासी
जालोर : अर्जुनसिंह देवड़ा

2008-20013
अशोक गहलोत सरकार : (कांग्रेस)
पाली : बीना काक, दिलीप चौधरी
सिरोही : कोई नहीं
जालोर : रतन देवासी

2013-2018
वसुंधरा राजे सरकार : (भाजपा)
पाली : सुरेन्द्र गोयल, पुष्पेन्द्रसिंह राणावत, मदन राठौड़
सिरोही : ओटाराम देवासी
जालोर : कोई नहीं

गुटबाजी से प्रदेश पर पड़ा असर
गुटबाजी के कारण आम आदमी का काम नहीं हो रहा है। किसी भी पार्टी में गुटबाजी चरम पर रहती है तो इसका असर प्रदेश के विकास पर पड़ता है। यहां भी विकास कार्य थम गए। -मुकेश आर्य, अधिवक्ता, पाली

लोकतंत्र के लिए उचित नहीं
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लोकतंत्र के पुजारी है। उनके नेतृत्व में चुनी हुई सरकार को सचिन पायलट और उनके समर्थकों ने गिराने की कोशिश की। यह लोकतंत्र के लिए भी उचित नहीं है। आलाकमान का फैसला सही है। -मनीष पालरिया, अध्यक्ष, एनएसयूआइ, पाली

युवाओं का अपमान हुआ
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलटी की आपसी लड़ाई थी। कांग्रेस आलाकमान के कदम से युवाओं का अपमान हुआ है। राजनीतिक दलों में लोकतंत्र होना चाहिए। सियासी उठापटक से प्रदेश का विकास रुका है। -राकेश पंवार, सामाजिक कार्यकर्ता, पाली

ये बीजेपी की चाल है
राजस्थान में घटनाक्रम बीजेपी की चाल है। गहलोत सरकार अभी और साढ़े तीन साल तक राज्य की जनता की सेवा करेगी। सरकार ने जनहित में कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। -प्रमोद प्रजापत, प्रदेश सचिव, एनएसयूआइ।

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