तीन बार से लगातार सत्ता में भागीदार, फिर भी नहीं हो पाए निहाल

तीन बार से लगातार सत्ता में भागीदार, फिर भी नहीं हो पाए निहाल

Suresh Hemnani | Publish: Nov, 11 2018 02:02:02 AM (IST) Pali, Pali, Rajasthan, India

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-श्याम शर्मा
जैतारण। प्रदेश की सियासत में जैतारण का खासा दबदबा रहा है। खासतौर से पिछली तीन सरकारों में जैतारण की भागीदारी रही है। पांच बार विधायक चुने गए सुरेन्द्र गोयल वर्तमान में सरकार में जलदाय मंत्री है। पहले की भाजपा सरकार में भी मंत्री रहे थे। बीच में पांच साल के लिए आई कांग्रेस सरकार में भी जैतारण का बोलबाला रहा। निर्दलीय चुने गए दिलीप चौधरी संसदीय सचिव बने। लगातार तीन सरकारों में सत्ता में भागीदार रहने के बावजूद जैतारण विधानसभा के मतदाता निहाल नहीं हो पाए।

दोपहर का वक्त. जयपुर-जोधपुर हाइवे को छोड़ ज्योंही जैतारण कस्बे में प्रवेश किया तो टूटी सडक़ों ने अहसास कराया कि ये कस्बा बदहाली का शिकार है। पहले से ही संकरे रास्ते पर लगे डिवाइडर से रास्ता और अधिक संकरा नजर आया। आगे बढ़ते हुए जब रोडवेज बस स्टैण्ड पहुंचे तो यातायात पुलिस चौकी पर लगा ताला देख पास जा पहुंचा। चौकी के बगलवाली दुकान पर चौकी बंद होने की वजह पूछी तो वहां खड़े व्यक्ति ने कहा कि ये तो आज ही बंद है। तभी पड़ौसी दुकानदार ने बात काटते हुए कहा साहब ये चौकी तो नाम मात्र की है। एक माह से ज्यादा समय से यह बंद ही है। चौकी उनकी बात में दम लगा। क्योंकि चौकी रोजाना खुलती और ट्राफिक व्यवस्था के प्रति पुलिस सजग होती तो हाथ ठेले व वाहन इस तरह बेतरतीब खड़े न होते।
रोडवेज बुकिंग परिसर में विचरण करते बेसहारा मवेशियों व चहुं ओर पसरी गंदगी ने भी अहसास करा दिया कि सफाई व्यवस्था के प्रति नगर निकाय कितना संजिदा है। इस बारे में बस के इंतजार में खड़े यात्रियों से पूछा तो वे व्यंग्यात्मक अंदाज में बोले, ‘जैतारण का तो भगवान ही मालिक है।’ हम आगे बढ़े तो रोडवेज बस स्टैण्ड के ठीक पीछे की तरफ निजी बस स्टैण्ड आया। यहां निजी बसें व हाथ ठेले ऐसे खड़े हो थे मानो किसी यात्री को रास्ता ही नहीं देना है। यहां से मुख्य बाजार की तरफ रुख किया तो वहां के हालात देख बड़ी हैरानी हुई। बाजार की संकरी गलियों में कुछ महिलाएं दुकान लगा सामान बेच रही थी। दुपहिया वाहन इस कदर खड़े नजर आए मानो किसी खिलौने की दुकान में खिलौने बिखरे पड़े हो। इस रास्ते से दुपहिया वाहन का निकलना भी मुनासिब नहीं है। इसी रास्ते से आगे बढ़े तो पुलिस थाना मुख्य बाजार में ही नजर आया। किले जैसे बड़े भवन में संचालित पुलिस थाने में बड़ा-सा गेट लगा था। आस पास दुकानें बनी हुई।
इस स्थिति में यह कहना गलत नहीं होगा कि संकरी गलियों से निकलने में पुलिस को कितनी मशक्कत करनी पड़ती होगी। मुख्य बाजार के हालात देखने के बाद दोबारा बस स्टैण्ड वाले रास्ते से होकर आगे बढ़े। मेड़ता जाने वाले मार्ग तक सडक़ के दोनों तरफ बदहाल सडक़ें व बेतरतीब वाहनों का जमावड़ा ही नजर आया। यहां से जब कचहरी रोड की तरफ टर्न किया तो सडक़ किनारे गहरे नाले नजर आए। जिन पर सुरक्षा के लिहाज से कोई प्रबंध नही दिखे। आगे सरकारी अस्पताल बना हुआ। जहां बाहर बैठे मरीज अस्पताल खुलने की राह देखते नजर आए। कचहरी से पहले ही आम रास्ते को पार करता टूटा नाला विकास की चुगली करता नजर आया। वाहन चालक नाले से बचते हुए मजबूरन साइड से होकर गुजरते हैं। पावनधाम के मुहाने गंदगी का अम्बार जैतारण की पहचान पावन धाम से होती है। यहां जैन संत मिश्रीमल महाराज व लोकमान्यसंत रूपमुनि महाराज की समाधि है।
पावनधाम के ठीक सामने मकानों से सटा हुआ बड़ा नाला हैं। इसमें गदंगी भरी दिखी। पावन धाम के सामने चौकीदारों की बस्ती है। जहां मकानों के बीच गंदा पानी भरा हुआ था। आस पास के मकानों में रहने वाले लोगों से इस बारे में पूछा तो मानों उनके जख्मों पर नमक छिडक दिया हो। मकान के मुहाने नाले बने हैं जिनमें पानी की निकासी नहीं है। मकान के बगल में गंदे पानी का तालाब भरा हुआ है। ये गंदा पानी नालों की निकासी के अभाव में इसी बस्ती में आकर जमा हो रहा है। ऐसी की वहां दस मिनट खड़ा रहना मुश्किल रहता। लोग मजबूरी में उन्ही मकानों में रहते हैं।

47 करोड़ से राहत की बजाय बढ़ गई परेशानी
जैतारण में सिवरेज लाइन बिछाने के लिए सरकार ने 47 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। जहां लाइन बिछाई गई वहां सडक़ों का निर्माण नही किया। जिससे वाहनों का धंसना व पलटना आम बात है। जैतारण में चहुं ओर जमा गंदा पानी इस बात की गवाही दे रहा है कि सरकार के 47 करोड़ जनता को राहत नहीं दे पाए हैं। तीन दिन में जलापूर्ति वह भी अपर्याप्त जैतारण की जनता को तीन दिन के इंतजार के बाद पानी नसीब होता है वह भी अपर्याप्त। जिससे उन्हे टेंकर मंगवाने पड़ते हैं। कभी हैंडपंप की दौड़ लगानी पड़ती है। चुप्पी की एक वजह ये भी जैतारण में गंदगी व टूटी सडक़ों को लेकर सत्ता पक्ष के नेता खामौश है। प्रतिपक्ष के भी चुप्पी साधने के पीछे जनता का आरोप है कि नगर पालिका बोर्ड प्रतिपक्ष का है। जैतारण में रेल सुविधा आज भी जनता के लिए जागती आंखों से देखा गया सपना है। यहां के लोग रेल यात्रा के लिए आजादी के बाद से आज तक 60 किलोमीटर दूर ब्यावर की दौड़ लगाने पर विवश है।

प्रमुख समस्या
-पेयजल संकट बरकरार। जवाई बांध का पानी सभी गांवों में पहुंचाया जाना चाहिए।
-सिवरेज का अधूरा काम शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
-ग्रामीण क्षेत्र में परिवहन साधनों का अभाव है। रोडवेज बसों का संचालन कराए जाने की आवश्यकता।
-राष्ट्रीय राजमार्ग 39 पर यातायात का दबाव बढ़ गया है। रास से ब्यावर तक फोरलेन का निर्माण किया जाना चाहिए।
-बर के निकट से नहर निकलती है, लेकिन यहां के किसानों को फायदा नहीं मिलता। क्षेत्र को नहरों से जोड़ा जाना चाहिए।
-बिलाड़ा से बर तक रेल लाइन बिछाई जानी चाहिए।
-बर के आदर्श पीएचसी में पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ नहीं है। स्टाफ की नियुक्त की जानी चाहिए।
-गायों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
-पिछला चुनाव परिणाम

प्रत्याशी पार्टी प्राप्त मत मतों का प्रतिशत
-सुरेन्द्र गोयल भाजपा 81066 48.72
-दिलीप चौधरी कांग्रेस 46192 27.76
-कृष्णसिंह गुर्जर निर्दलीय 12636 7.59
-सायल काठात निर्दलीय 6186 3.72
-शक्तिसिंह निर्दलीय 2833 1.70

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