इंटरनेट के दौर में मंच पर जीवंत है रामलीला

इंटरनेट के दौर में मंच पर जीवंत है रामलीला

Om Prakash Tailor | Publish: Oct, 14 2018 10:45:29 AM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 10:45:30 AM (IST) Pali, Rajasthan, India

दर्शक घटे, लेकिन नहीं कम हुआ कलाकारों का उत्साह

ओम टेलर

पाली. मोबाइल, इंटरनेट व वेब दुनिया के जमाने में मनोरंजन के ढेर सारे साधन उपलब्ध हैं। ऐसे युग में मंच पर रामलीला का मंचन का मंचन कर इसे जिंदा रखा है पाली के कलाकारों ने। जो बिना किसी मेहनताने के महज संस्कृति को आगे बढ़ाने और मंच के प्रति लोगों में आकर्षण बनाए रखने के लिए हर नवरात्र में रामलीला का मंचन करते हैं। इसमें किरदार निभाने वाले कलाकार पेशेवर नहीं आम व्यक्ति है। जो दिनभर वकालात, खेती या अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं और शाम को पहुंच जाते है रामलीला मैदान। जहां दशहरे तक राम कथा का जीवंत अभिनय करते हैं। जिसमें शहर के भामाशाहों व नगर परिषद का आर्थिक सहयोग रहता हैं।
ऐसे हुई रामलीला की शुरुआत
आज से 40 वर्ष पूर्व मनोरंजन के साधन कम थे। नवरात्र में डांडिया आयोजन नहीं होता था और न गणपति उत्सव इतने धूमधाम से मनाया जाता था। उस समय महाराजा उम्मेद मिल में काम करने वाले विद्याशंकर शास्त्री ने मिल श्रमिकों के मनोरंजन के लिए स्टेज पर रामलीला मंचन करने का मन बनाया।
अपने विचार से उन्होंने सी.पी. पारीक, के.एल. अहूजा, के. शर्मा, ईदू खान, पुरुषोत्तम सारण, हरिचरण वैष्णव, सुरेश बापू आदि को साझा किया और रामलीला की शुरुआत की। वर्ष १९७६ में उम्मेद मिल के आर्थिक सहयोग से बांगड़ धर्मशाला में रामलीला मंचन किया गया। जिसे देखने के लिए शहरवासियों की भीड़ उमड़ी। इसके बाद रामलीला मैदान में इसका मंचन शुरू किया गया। जहां नगर परिषद के सहयोग से पक्का स्टेज बनाया गया। यहां आज भी दानदाताओं के सहयोग से पात्रों की विशेभूषा व मेकअप का सामान आता है।
शर्मा ने लिखी थी स्क्रिप्ट
43 वर्ष पूर्व रामलीला नृत्य-नाटिका मंचन की स्क्रिप्ट के. शर्मा ने लिखी थी। वे आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके लिखे डायलॉग आज भी रामलीला चलते हैं। उसी के आधार पर आज तक कलाकार अपने संवाद बोलकर दर्शकों की तालियां बटोर रहे हैं।
पुरुष ही निभाते थे महिला का पात्र
रामलीला मंडली ने वह जमाना भी देखा है जब महिला किरदार के लिए कोई महिला कलाकार नहीं मिलती थी। ऐसे में पुरुषों को ही महिलाओं के किरदार निभाने पड़ते थे। नरेन्द्र सारण कैकेयी, शुर्पणखा और सीता का पात्र निभाते थे। इसके साथ ही हरीसिंह, गणेश परिहार गोपाल राठौड़ भी महिला पात्रों के किरेदार निभाते थे।
सिंधी समाज देता है धर्मशाला
बांगड़ धर्मशाला में रामलीला का मंचन बंद होने के बाद कलाकारों के रिहर्सल को लेकर परेशानी आने लगी। इस पर सिंधी समाज आगे आया और सिंधी कॉलोनी स्थित समाज की धर्मशाला नि:शुल्क उपलब्ध करवाई। जहां आज भी कलाकार रामलीला शुरू होने से करीब एक माह पूर्व अभ्यास शुरू कर देते हैं।
रावण-सीता एलएलबी, राम इवेंट मैनेजर
स्टेज पर राम, रावण व सीता का किरेदार जीवंत करने वाले कलाकार पेशेवर नहीं है। रावण का किरदार निभाने वाले जीवराज चौहान पेशे से एडवोकेट है। जिनका उपनाम ही अब रावण हो गया है। सीता का किरदार निभाने वाली संतोष एलएलबी की विद्यार्थी है तो राम का किरदार निभाने वाले रोहित शर्मा इवेंट मैनेजर है। इसी तरह लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले गोविन्द गोयल प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। मेघनाद बनने वाले मांगूसिंह दूदावत राष्ट्रीय स्तर के वेट लिफ्टर तो परशुराम का किरदार निभाने वाले गणेश परिहार सरकारी कर्मचारी है। रामलीला का मंचन करीब 50 कलाकार मिलकर करते हैं।

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