पढंे़ : अब इंडोनेशिया के र्इंधन पर टिके है हमारे सीमेंट और कपड़ा उद्योग...

Avinash Kewaliya

Publish: Dec, 08 2017 01:10:56 (IST)

Pali, Rajasthan, India
पढंे़ : अब इंडोनेशिया के र्इंधन पर टिके है हमारे सीमेंट और कपड़ा उद्योग...

- पाली का कपड़ा उद्योग में डेढ़ गुना तक बढ़ी कीमत

- भट्टी में बदलाव करने के लिए इकाई संचालकों को खर्च करनी होगी राशि

 

पाली.

पेटकोक पर प्रतिबंध हमारे जिले के सीमेंट और कपड़ा उद्योग को सर्वाधिक प्रभावित कर रहा है। दोनों ही उद्योग में पेटकोक प्रमुख ईंधन के साधन के रूप में था। अब सीमेंट इंडस्ट्री में कोयला और कपड़ा इंडस्ट्री में इंडोनेशिया के कोक पर आश्रित होना पड़ रहा है। लेकिन इनकी उपलब्धता और लागत इतनी अधिक है कि दोनों ही उद्योग काफी प्रभावित हो रहे हैं। पेट्रोलियम पदार्थ के सह उत्पाद के रूप में लम्बे समय तक उद्योगों में पेटकोक को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से गाइड लाइन जारी करने पर कई उद्योगों में संकट खड़ा हो गया। हमारे जिले के दो प्रमुख उद्योग जो कि हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाते हैं वह भी अधिक प्रभावित हुए हैं। इससे सीमेंट उद्योग और कपड़ा उद्योग की लागत बढऩे की भी आशंका है।

कपड़ा उद्योग ऐसे होगा प्रभावित

- पेटकोक के स्थान पर विकल्प के रूप में जिस कोक या लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है उसकी उपलब्धता काफी कम है। पाली के पूरे उद्योग जगत को सप्लाई हो सके, इतना एक ही प्रकार का ईंधन विकल्प नहीं है।

- इंडोनेशिया कोक जो कि प्रमुख विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। वह पेटकोक के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक कीमती है।

- कपड़ा प्रोसेस की कीमत भी इस ईंधन लागत के कारण बढऩे की आशंका है।

- अब जो ईंधन के रूप में पदार्थ उपयोग में आएगा उसके लिए कपड़ा इकाइयों को भट्टियों में परिवर्तन करना होगा। इसके लिए करीब 2 से 3 तीन लाख का खर्च प्रत्येक इकाई संचालक को करना होगा।

इंडोनेशिया के कोयले पर आश्रय

जब से पेटकोक प्रतिबंध हुआ है तब से पाली में इंडोनेशिया के कोयले की डिमांड बढ़ गई है। कई लोग लकड़ी के टुकड़े और गट्टों का उपयोग भी कर रहे हैं। लेकिन, खास बात यह है कि यह विकल्प इस उद्योग की लागत को काफी बढ़ा रहा है। अकेले कपड़ा उद्योग पर 25 प्रतिशत से अधिक लागत का फर्क आया है।

सीमेंट इंडस्ट्री कोयले पर विस्थापित

पाली जिले में सीमेंट इंडस्ट्री की तीन बड़ी इकाइयां संचालित हो रही है। इनमें अधिकांश में पेटकोट का ही उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता था। लेकिन, पेटकोक पर प्रतिबंध लगने के बाद साधारण कोयले को ही इसका विकल्प माना जा रहा है। करीब 50 प्रतिशत तक इसका उपयोग इस उद्योग में हो रहा था, इसे पूर्णत: बंद कर दिया गया है। इससे ईंधन की लागत और कोयले के उपयोग से वायु प्रदूषण बढऩे का खतरा भी बढ़ गया है।

गाइड लाइन का इंतजार
अभी राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से किसी प्रकार की गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। पूरे प्रदेश का मामला है। ऐसे में मुख्य सचिव स्तर पर मंथन चल रहा है।

- राजीव पारीक, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल पाली।

लाखों का भार पड़ा है

पेटकोट पर प्रतिबंध के बाद से कपड़ा उद्योग काफी प्रभावित हुआ है। करीब 25 प्रतिशत तक ईंधन लागत बढ़ी है। इससे कपड़ा प्रोसेसिंग की लागत भी बढ़ेगी। बॉयलर भट्टी में भी व्यापारियों को परिवर्तन करना पड़ेगा। इस कार्य में भी करीब 2 लाख से अधिक का खर्च आएगा।
- रवि मेहता, अध्यक्ष, पावर प्रोसेस एसोसिशन पाली।

 

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