यहां के निजी अस्पतालों ने मरीजों का इलाज करने से क्यों कर दिया मना, जानिए पूरा मामला

-भामाशाह योजना में करोड़ों बकाया
-योजना के तहत मिलने वाली राशि हुई बंद

By: Suresh Hemnani

Published: 20 Jul 2020, 06:00 PM IST

पाली/सुमेरपुर। पूर्व सरकार के समय जरुरतमंदों के लिए शुरू की गई भामाशाह योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी चिकित्सालयों ने करोड़ों की राशि बकाया होने व बार-बार पत्र व्यवहार करने के बाद भी संतोषजनक जबाव नहीं मिलने के बाद इलाज बंद कर दिया है। इस स्थिति में लाखों मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पाली जिले के सुमेरपुर शहर के अधिकांश निजी हॉस्पिटल के अलावा पाली जिले का सबसे बड़ा निजी हॉस्पिटल भगवान महावीर हॉस्टिल ने भी इलाज करने से मना कर दिया है।

पूर्व राज्य सरकार ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। योजना के तहत खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों को इस योजना के तहत 30 हजार रुपए तक के नि:शुल्क इलाज के लिए एक कार्ड जारी किया जाता था। कार्ड निजी हॉस्पिटल में ले जाकर मरीज निर्धारित राशि तक नि:शुल्क इलाज करवा सकता था। राशि सीधे निजी हॉस्पिटल को मिलती थी। इससे अधिक राशि खर्च होने वाली गंभीर बीमारी के इलाज के लिए संबंधित उपखण्ड अधिकारी अथवा जिला कलक्टर से अनुशंसा करवाने पर अधिकतम 5 लाख तक नि:शुल्क इलाज होता था।

सरकार बदलते ही योजना भी बदली
भाजपा सरकार सत्ता से हटते ही गहलोत सरकार ने सत्ता संभाली। दूसरी योजनाओं को बदलने, संशोधित करने व समाप्त करने के साथ ही भामाशाह योजना का नाम बदलकर इसे भारत सरकार की आयुष्मान योजना में समाहित करते हुए आयुष्मान भारत महात्मा गांधी स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से लागू की। भामाशाह कार्ड को खारिज करते हुए जन आधार कार्ड शुरू किए। इसी प्रकार योजना का संचालन पहले नेशनल एश्योरेंस कंपनी करती थी, लेकिन बकाया राशि नहीं मिलने व योजना में पर्याप्त लाभ नहीं मिलने से हाथ खडे कर दिए। इस समय योजना का संचालन कार्यकारी एजेंसी के रूप में राजस्थन स्टेट हेल्थ एश्योरेंस ऑथोरिटी जयपुर कर रही है।

योजना का दायरा बढ़ते ही भुगतान गड़बड़ाया
राजस्थान सरकार ने योजना का लाभ अधिकाधिक लोगों को दिलाने के लिए कई गंभीर बीमारियों को भी इसमें शामिल कर दिया। दावा राशि बढ़ते ही एश्योंरेस कंपनी का लाभ-हानि खाता गड़बड़ाने लगा। आखिर में कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए।

करोड़ों बकाया, आखिर में इलाज करना किया बंद
सुमेरपुर समेत प्रदेश के हजारों निजी हॉस्पिटल का सरकार में योजना के तहत करोड़ों राशि बकाया चल रही है। पाली जिले के सबसे बडे निजी हॉस्पिटल भगवान महावीर हॉस्टिल का नेशनल एश्योरेंस एजेंसी में 175 दावों के 9 लाख 39 हजार 350 रुपए व आयुष्मान भारत महात्मा गांधी स्वास्थ्य बीमा योजना में 1887 दावों के 1 करोड़ 8 लाख 34 हजार 700 रुपए समेत कुल 2061 दावों के 1 करोड़ 17 लाख 74 हजार 50 रुपए बकाया चल रहे थे। हॉस्पिटल प्रशासन ने जिला कलक्टर, जिला योजना प्रभारी समेत राज्य सरकार को कई बार पत्र व्यवहार किया, लेकिन कोई संतोषजनक जबाव नहीं मिला। आखिर एक जुलाई से योजना के तहत होने वाला इलाज का कार्य बंद कर दिया। यही स्थिति सुमेरपुर के अन्य निजी हॉस्पिटल की है। अब मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिलने से वे भटक रहे हैं।

अधिकारी ने बताया
लॉकडाउन से पहले योजना की कार्यकारी एजेंसी ने काम करना बंद कर दिया। अब सरकार स्वयं योजना का संचालन कर रही है। निजी हॉस्पिटल संचालकों ने बकाया राशि के बारे में जानकारी दी है। हमने उच्चाधिकारियों को पत्र भेज दिया है। योजना का लाभ हर जरूरतमद को दिलाने का प्रयास किया जाएगा। -डॉ. शरद सक्सेना, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सुमेरपुर

प्रबंधन ने बताया
हमारा चिकित्सालय ट्रस्ट की ओर से चलाया जाता है। क्षेत्र के जरूरजमंद लोगों को योजना के तहत लाभ दिलाया जाता रहा है। योजना के तहत हॉस्पिटल का 2061 दावों की 1 करोड़ 17 लाख से अधिक राशि बकाया चल रही है। कई बार अधिकारियों व सरकार समेत जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों व स्टाफ का वेतन देना मुश्किल हो रहा है। अत्यंत गरीब लोगों का ट्रस्ट की ओर से नि:शुल्क इलाज करवाकर राहत दिलाते हैं। -इन्दरसिंह राणावत, प्रशासनिक अधिकारी, भगवान महावीर हॉस्पिटल, सुमेरपुर।

Suresh Hemnani
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