'राजधानी से पाली की 'जीवनरेखा को संजीवनी, सेसकर की अटकी राशि मिलने से खिली बांछे....यहां पढे़ खबर

- कपड़ा उद्योग को मिली साढ़े तीन करोड़ से अधिक की सेसकर राशि की दूसरी किस्त

- उद्यमियों से लिया गया लोन लौटाने की उम्मीद बंधी

By: Avinash Kewaliya

Published: 10 Feb 2018, 12:55 PM IST

पाली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल बेंच में चल रही सेसकर संबंधी मामले की सुनवाई नई दिल्ली में स्थानांतरित होने के बाद पाली के कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिली है। पिछले चार माह से अटकी सेसकर की राशि कपड़ा उद्योग को मिल चुकी है। अब उद्यमियों से तीन किस्तों में लिया गया ऋण लौटाने में मदद मिलेगी। साथ ही सीईटीपी संचालन में आ रही रुकावटें भी दूर की जा सकेगी। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण रोकने में नाकाम होने की दलीलें देने पर सीईटीपी को मिलने वाली सेसकर की राशि को राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल में जमा करवाने के आदेश दिए थे। इसके बाद नगर परिषद की ओर से सेसकर की वसूली कर अंश सीईटीपी की बजाय आरपीसी को जमा करवाया जाता है। इसी कारण सीईटीपी में पानी ट्रीट करने और संचालन पर संकट खड़ा हो गया था। इसी लिए सवा दो करोड़ की राशि दो बार व्यापारियों से लोन के रूप में ली गई। वहीं तीसरी बार भी यह लोन राशि लेने की तैयारी की जा रही थी।

अब तक मिली करीब सात करोड़ की राशि

आरपीसीबी की ओर से सीईटीपी को पहली किस्त के दौर पर 3 करोड़ 28 लाख रुपए की राशि दी गई थी। अब चंद दिनों बाद ही 3 करोड़ 70 लाख की राशि दी गई है। ऐसे में करीब 7 करोड़ की राशि अब तक सीईटीपी को सेसकर की दी जा चुकी है। ऐसे में अब व्यापारियों से लिया गया करीब 5.5 करोड़ से अधिक राशि का लोन उन्हें पुन: लौटाया जा सकेगा।

मुख्यालय के आदेश पर मिली राशि

सेसकर की यह वसूली नगर परिषद की ओर से की जाती है। 10 प्रतिशत अपना हिस्सा काट कर परिषद 90 प्रतिशत राशि सीईटीपी को देती है। इसी राशि से प्लांट का संचालन किया जाता है। एनजीटी के आदेश पर यह राशि रोक दी गई थी। अब ऐसा माना जा रहा है कि एनजीटी की मौन स्वीकृति पर आरपीसीबी मुख्यालय के आदेश पर यह राशि जारी करवाई गई है।

Avinash Kewaliya
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned