तिल की फसल पर खतरे के बादल, किसान चिंतित

- जिले भर में 64 हजार 540 हैक्टेयर में तिल की बुवाई
- जिले में अभी तक 441.92 एम.एम. बारिश

By: Suresh Hemnani

Published: 02 Sep 2020, 07:48 AM IST

पाली। जिले भर में दो दिन से हो ही मूसलाधार बारिश के बाद अब खेत-खलिहानों में खड़ी तिल की फसल में खराबे की चिंता सताने लगी है। खेतों में पानी भर जाने से तिल की फसल गल गई है। सबसे ज्यादा नुकसाान जिले के बाली, मारवाड जंक्शन, रायपुर, जैतारण, देसूरी व सुमेरपुर में देखने को मिल रहा है। मौसम में नमी के कारण भी तिल की फसल में कीट का प्रकोप देखने को मिला है। हालांकि, किसान कीट को मारने के लिए तिल की फसल में दवाइयों का स्प्रे कर रहे हैं।

इस बार लक्ष्य के मुकाबले कम हुई बुवाई
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में तिल की बुवाई का लक्ष्य 80 हजार हैक्टेयर में था। जिसके मुकाबले में 64 हजार 540 हैक्टेयर में ही तिल की फसल की बुवाई हुई है।

इतनी हुई बारिश
जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पाली में 352.20 एमएम बारिश हुई है। जबकि, रोहट में 331, मारवाड़ जंक्शन में 521, सोजत में 444, रायपुर में 422, जैतारण में 473, बाली में 525, देसूरी में 561 रानी में 360 व सुमेरपुर में 430 एम.एम. बारिश हुई है।

तिल का पौधा पड़ रहा काला
ज्यादा बारिश होने व खेतों में पानी भर जाने के कारण तिल का पौधा काला पड़ कर गिर रहा है। तिल की फसल खराब हो ही है। फसल में कीट का रोग भी फैला है। -गिरधारीसिंह चांदावत, किसान, दूदौड़

पानी को खेत से बाहर निकालें
जिले में जहां पर खेतों में पानी भर गया है। वहां पर किसान अपने खेत का पानी बाहर निकालें। खेत में पानी भरने पर फसल खराब होती है। जहां पर ज्यादा बारिश हुई है। वहां पर तिल की फसल को नुकसान हो सकता है। -शंकरराम बेड़ा, उपनिदेशक, कृषि विभाग विस्तार, पाली

Suresh Hemnani
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