खबर में पढ़े कैसे राज्य सरकार का आदेश किसानो के लिए बना मुसीबत का सबब

खबर में पढ़े कैसे राज्य सरकार का आदेश किसानो के लिए बना मुसीबत का सबब

Avinash Kewaliya | Publish: Nov, 15 2017 02:14:09 PM (IST) Pali, Rajasthan, India

- एक बार में 25 क्विंटल से ज्यादा नहीं तोल रहे मूंग

 

- किराया व समय खर्च कर किसान दो से तीन बार काट रहे मंडी के चक्कर

पाली .

राज्य सरकार के एक आदेश ने जिले के काश्तकारों की मुसीबतें बढ़ा दी है, जिससे उन्हें समय व धन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने मंडी सचिव से शिकायत भी की, लेकिन काश्तकारों को राहत नहीं मिल पाई है। मंूग की फसल समर्थन मूल्य पर बेचने को लेकर इन दिनों जोधपुर रोड स्थित कृषि उपज मंडी में किसानों की भीड़ है। लेकिन सरकार के एक आदेश ने किसानों के चक्कर बढ़ा दिए है। पहले किसान अपनी उपज एक बार में ही समर्थन पर मंडी बेच देते थे। लेकिन वर्ष 2017 में सरकार ने नया आदेश निकाला। जिसके तहत किसानों को पहले समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। तारीख मिलने के बाद गिरदावरी में बनने वाली फसल में से महज 25 क्विंटल फसल ही एक बार में तोल रहे है। जबकि ट्रेक्टर में एक बार में 50 क्विंटल मूंग की फसल आ जाती है लेकिन चाह कर भी किसान एक साथ 50 क्विंटल फसल समर्थन मूल्य पर नहीं तोला पा रहे है। सरकार के नए आदेश के कारण उन्हें दोबारा समय व ट्रेक्टर किराया खर्च कर मंडी के चक्कर काटने पड़ रहे है।

चक्कर काटने से बढ़ रहा खर्चा

मेरे खेत में 40 क्विंटल से भी ज्यादा मूंग की उपज हुई। समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए मुझे दो-तीन चक्कर मंडी के करने पड़े। क्योंकि एक बार में 25 क्विंटल से ज्यादा मूंग नहीं तोल रहे है।

- चिमनाराम चौधरी, किसान, इन्द्रोका की ढाणी

एक साथ नहीं ले रहे माल

एक साथ मूंग समर्थन मूल्य पर नहीं खरीद रहे। ऐसे में पहले ई-मित्र के चक्कर काटने पड़ रहे है। उसके बाद दो-तीन बार डीजल जलाकर मंडी आना-जाना पड़ रहा है। एक साथ ही समर्थन मूल्य पर उपज ले लेते तो मंडी के चक्कर से निजात मिल जाती।

- हुकमाराम सीरवी, किसान, इन्द्रोका की ढाणी

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