स्वामी विवेकानंद जयंती विशेष : शिकागो जाने से पहले विवेकानंद ने माउंट आबू में की थी साधना

-माउंट आबू की गुफा में स्वामी विवेकानंद ने की थी तपस्या
-चंपा गुफा नाम से जाना जाता है

By: Suresh Hemnani

Published: 12 Jan 2021, 08:56 AM IST

पाली। युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की जीवन यात्रा में माउंट आबू का पड़ाव भी अहम माना जाता है। नक्की झील के दक्षिणी तट स्थित टॉड रॉक की ओर जाने वाले मार्ग की सीढिय़ों के मध्य बनी चंपा गुफा में उन्होंने करीब 4 माह तक साधना की थी। माउंट से लौटने के बाद वे शिकागो के धर्म सम्मेलन में शरीक हुए थे। नक्की झील के निकट बनी गुफा स्वामी के सफर की आज भी साक्षी है।

विवेकानंद 1891 में जब राजस्थान भ्रमण पर आए तो बांदीकुई से ट्रेन में सवार होकर अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ होते हुए माउंट पहुंच गए। ध्यान और साधना के लिए माउंट की वादियां इतनी रास आई कि वे चार माह तक चंपा गुफा में साधना में लीन रहे।

माउंट ही बना खेतड़ी राजा से भेंट का माध्यम
स्वामी विवेकानंद और खेतड़ी के तत्कालीन राजा अजीतसिंह के बीच प्रगाढ़ रिश्ते रहे हैं। खेतड़ी के राजा और विवेकानंद की भेंट का माध्यम भी माउंट ही बना था। किशनगढ़ रियासत के मुंशी फैज अली ने स्वामी से मुलाकात की और उन्हें किशनगढ़ कोठी चलने का आग्रह किया। किशनगढ़ कोठी में उनकी भेंट खेतड़ी के तत्कालीन दीवान जगमोहन लाल स्वामी से हुई। बताया जाता है कि वे कुछ समय स्वामी खेतड़ी हाउस में भी रहे। इसके बाद खेतड़ी के राजा से रिश्ते प्रगाढ़ होते गए। वे तीन बार खेतड़ी आए। खेतड़ी के राजा ने ही धर्मसम्मेलन में शिरकत करने शिकागो जा रहे स्वामी के लिए हवाई जहाज का टिकट बुक कराया था। ‘राजस्थान में विवेकानंद’ पुस्तक के लेखक हनुमानसिंह राठौड़ ने इन बातों का जिक्र अपनी पुस्तक में किया है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद के जीवन सफर में माउंट की यादें भी अविस्मरणीय है।

मित्र को लिखा था पत्र
माउंट आबू स्थित रामकृष्ण आश्रम सूत्रों के अनुसार विवेकांनद ने शिकागो धर्म सम्मेलन में जाने से पूर्व अपने एक मित्र गोविंद सहाय को पत्र लिखकर मन की पीड़ा व्यक्त की थी। उन्होंने पत्र में लिखा कि मेरे देश का युवा सोया हुआ है। मैं उसे जगाना चाहता हूं।

गुफास्थल विकास को मोहता
स्वामी विवेकानंद को पूरी दुनिया में याद किया जाता है। लाखों-करोड़ों युवाओं ने स्वामी के बताए पदचिन्हें पर चलकर अपना भविष्य संवाद दिया, लेकिन चंपा गुफा को अब भी विकास की दरकार है। जयंती पर साफ-सफाई के अतिरिक्त कुछ भी नहीं होता है।

Suresh Hemnani
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