ऐसे शिक्षकों के संघर्ष की कहानी, जिन्होंने जज्बे से विद्यालयों की सूरत ही नहीं संवारी, शिक्षा का महत्व भी समझाया

शिक्षक दिवस 2020 विशेष :

By: Suresh Hemnani

Updated: 05 Sep 2020, 12:14 PM IST

अपना ही नहीं अन्य स्कूलों को भी बदला
पाली। Teachers day 2020 special : जिले के रास के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की व्याख्याता उषा भारद्वाज ऐसी शिक्षिका है, जो तीस वर्ष से अपने पद स्थापित स्कूल के साथ अन्य विद्यालयों को भी बदल रही है। अंग्रेजी की व्याख्याता उषा ने कई स्कूलों में भामाशाहों से सम्पर्क कर सुविधाओं का विकास करया है। विद्यार्थियों को गणवेश एवं शिक्षण सामग्री दिलवाने के साथ स्कूलों में पेयजल, अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था, बालिकाओं के लिए शौचालय कम्प्यूटर, प्रिन्टर, खेलकूद सामग्री की व्यवस्था करवाई। उनको 2018 में भामाशाह प्रेरक का राज्यस्तरीय सम्मान भी दिया गया था। उन्होंने 23 स्कूलों में 32 लाख से कार्य करवाए है। इसमें विद्यालय भवन के साथ ही फर्नीचर, स्टेशरी आदि की व्यवस्था करवाई है।

गुड़ा मोकमसिंह, जहां बच्चों के साथ अभिभावकों के भी चहेते हैं कुम्पावत
धनला। गांव गुड़ा मोकमसिंह स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक इंदरसिंह कुम्पावत बच्चों के साथ ग्रामीणों के भी चहेते हैं। वे 20 वर्ष से यहां अध्ययन करवा रहे है। विद्यालय प्रबंधनन समिति पूर्व अध्यक्ष रामलाल चौधरी ने बताया कि माली पहले शिक्षक थे। अब प्रधानाध्यापक है। वे बच्चों को लग्न से पढ़ाने के साथ अन्य कार्य भी करते हैं। उन्होंने स्कूल में पेयजल व्यवस्था, शौचालय निर्माण, कक्षों के छत की मरम्मत का कार्य करवाया। हाल ही में विद्यालय की आवंटित भूमि का पता करवाकर सफाई करवाई। जिससे उसका उपयोग किया जा सके।

यहां स्मार्ट कक्ष में पढ़ते हैं बच्चे
पाली/सोजत। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलाडिय़ा गेट सोजत में बच्चे स्मार्ट कक्षा में पढ़ते है। जबकि एक साल पहले यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। इस सकूल के शिक्षक सुरेशचंद मेवाड़ा ने विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए भामाशाहों को प्रेरित किया। उन्होंने पिछले सत्र में चार लाख रुपए से पानी का टैंक, वाटर कुलर, पानी की टंकी लगवाई। एपीएल कक्ष बनाया, जिसमें एलइडी के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है। विद्यालय में शारदा उद्यान के साथ कीचन गार्डन लगाकर सब्जियां उगाई है। दो टीन शेड बनाए है। जिसमें एक प्रार्थना सभा और दूसरा पार्र्किंग के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। उनके प्रयास से स्कूल का नामांकन 109 से बढकऱ 225 हो गया है।

36 बार किया रक्तदान
उन्होंने स्कूल का विकास कराने के साथ 36 बार रक्तदान किया है। इसके साथ ही पौध संरक्षण के लिए हाल ही में 1100 पौधे लगाए है। जिनकी जिम्मेदारी पांच-पांच लोगों का दल बनाकर दी गई है। उन्होने लॉकडाउन के दौरान लोगों से नौ लाख रुपए एकत्रित किए और 350 बोरी गेहूं व 2100 खाद्यान के पैकेट भी जरूरतमंदों में बांटे।

राबडिय़ावास... विद्यालय की बंजर जमीन पर खिलखिला रही बगिया
बाबरा। राबडिय़ावास के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की बंजर जमीन पर शिक्षक गणपतराम माली के प्रयासों से आज बगिया खिलखिला रही है। उन्होंने विद्यालय की जर्जर छत को भामाशाहों के सहयोग से ठीक करवाने के साथ ही प्रार्थना सभा के लिए टीन बनवाया। इलेक्ट्रीकल घंटी, कार्यालय में फर्नीचर, वाटरकुलर, प्रोजेक्टर, मां सरस्वती मंदिर स्थापना के साथ अन्य कार्य करवाए। उन्होंने स्कूल परिसर में खुद पौधे लगाए और उनकी देखभाल भी करते हैं। वे 2015 में ब्लॉक स्तर पर सम्मानित भी हो चुके हैं। प्रधानाध्यापक रणधीरसिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यालय के भौतिक विकास के साथ हरियाली को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक माली का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इधर, खुद की तनख्वाह से स्कूल में बनवा दिया शौचालय
मारवाड़ जंक्शन। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालया बारसा के विद्यार्थी शौचालय नहीं होने की समस्या से जूझ रहे थे। स्कूल के ही शिक्षक भूराराम चौधरी से यह सहा नहीं गया और उन्होंने खुद की तनख्वाह से शौचालय का निर्माण करा दिया। शिक्षक चौधरी यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित किया और स्कूल का रंग-रोगन, पानी का कनेक्शन और कम्प्यूटर भी उपलब्ध करा दिया। चौधरी की सक्रियता से भामाशाहों का कारवां बनता गया और विद्यार्थियों की समस्याएं कम होती गईं। अब प्रत्येक सत्र में भामाशाह सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पौधरोपण किया गया है। चौधरी के प्रयासों को शिक्षा विभाग भी सराहना कर चुका है।

एक शिक्षक ने मेहनत से सींचा ओरण, अब हजारों पेड़ लहलहा रहे
बाली (माण्डा)मारवाड़ जंक्शन। हर इंसान यदि ठान ले तो कोई भी काम असंभव नहीं। बाली (माण्डा) के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक नाथूसिंह ने ऐसा ही कर दिखाया। सिंह ने स्कूल परिसर को हरा-भरा करने के अलावा ओरण को भी संवारने का बीड़ा उठाया।

अलख महाराज मंदिर आस्था का केन्द्र है। अलख महाराज मंदिर का ओरण लगभग 1250 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर लकड़ी काटने पर भी प्रतिबंध है। शिक्षक सिंह ने इसी ओरण को हरा-भरा बनाने का बीड़ा उठाया। बाद में ग्रामीणों और विद्यार्थियों का भी सहयोग मिला। वर्तमान में यहां 5 हजार से ज्यादा पौधे पर्यावरण संरक्षण की कहानी बयां कर रहे हैं।

Suresh Hemnani Desk
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