ये धरोहरे है जो सालों से प्यास बुझाती आई है...अब संकट है तो इनकी भी सुध ले लो,ये फिर तैयार है। जिले में इा समय सभी बांध तालाब सूख चुके है। जिले वासियों की प्यास बुझाने के लिए आगामी दिनों में वाटर ट्रेन का सहारा लेना पड़ रहा है। जबकि गांव -कस्बों में आज भी बने प्राचीन कुंओं और बावड़ीयों की सार-संभाल नही होने से उनका उपयोग नही हो रहा है। यदि प्रशासन अभी भी चेत जाए और इन बावडियों और कुंओं की सार संभाल ले ले तो पानी की समस्या में कमी आ सकती है।

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