VIDEO : खटनावल के घर में खनक रहे सौ बरस पुराने सिक्के

Suresh Hemnani

Updated: 17 Jul 2019, 05:51:18 PM (IST)

Pali, Pali, Rajasthan, India

पाली/मारवाड़ जंक्शन। सिक्कों का चलन प्राचीन काल [ ancient coins ] से है। वर्तमान समय में सिक्कों की खनक कम हुई है, लेकिन भारतीय मुद्रा में सिक्कों महत्व रहा है। कइयों के लिए ये सिक्के किसी जुनून से कम नहीं होते। ऐसे ही सिक्कों के संग्रहणकर्ता है कस्बा निवासी के महेंद्रसिंह खटनावल।

पेशे से फोटोग्राफर खटनावल को सिक्कों के संग्रह [ Collection of coins ] की प्रेरणा अपने पिता प्रेमसिंह को मानते हैं। उन्होंने अपने समय के कुछ सिक्के जमा कर रखे थे। उन्हीं सिक्कों से खटनवाल ने सिक्के जोडऩा व जमा करना शुरू कर दिया। आज उनके पास सौ वर्ष पुराने सिक्कों का संग्रह है। ताम्बे, पीतल, एल्यूमिनियम, गिलिट आदि धातुएं के एक आने से लेकर दस रुपए तक का सिक्का उनके पास है। सरकार द्वारा समय समय पर जारी सिक्के खटनवाल के संग्रहलाय की शोभा बने हुए हैं।

1900 में तांबे के सिक्के का आना, 1920 एक आना 1950 में चार भाग 1957 में एक नया पैसा 1971 में एक पैसा, दो पैसा, तीन पैसा, पांच पैसा दस पैसा बीस पैसा पच्चीस पैसा का चलन। खटनवाल बताते हैं कि देश में एक रुपए का सिक्का सबसे पहले 1950 में जारी हुआ था। उनके पास प्राचीन भारतीय मुद्रा [ history of coins ] फूटी कौड़ी, कौड़ी, दमड़ी, धैला, पाई, पैसा, आना, रुपया समेत सौ वर्ष में प्रचलित सिक्कों के अनूठे संग्रह के कारण खटनवाल की पहचान ही ये सिक्के हो गए हैं। उनका कहना है कि ये हमारे इतिहास के जीवंत दस्तावेज है। इन्हें संजोकर संतोष की प्राप्ति होती है।

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